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Kahara, Saharsa | Mar 22, 2020

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◆◆ *अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अत्याचार (निवारण) अधिनियम के तहत जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक*

छपरा, 09 जून 2026

◆ जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आज अनुसूचित जाति/ जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आहुत की गई।
◆  जिला कल्याण पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि वर्ष 2023 से 2026 तक इस अधिनियम के तहत दर्ज  कुल 1100 कांडों में से 1055 मामलों में पीड़ित/आश्रित को देय मुआवजे के प्रथम क़िस्त की राशि का भुगतान किया गया है। 25 मामलों में संधि/सुलह की गई है।  शेष 20 मामलों में प्रथम क़िस्त के मुआवजे  का  त्वरित भुगतान की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। 
◆ इस अधिनियम के तहत दर्ज मृत्यु के मामलों में 57 निकटम आश्रितों को नियमानुसार पेंशन का भुगतान किया जा रहा है।सभी का माह अप्रैल 2026 तक के पेंशन का भुगतान किया जा चुका है। चार आश्रितों को सरकारी नौकरी दी गई है। एक अन्य मामले में आश्रित को नौकरी देने हेतु कार्रवाई प्रक्रियाधीन है, जिसे अविलंब पूरा करने का निदेश दिया गया।
◆ जिलाधिकारी ने इस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज होने पर इसकी एक प्रति अविलंब ई-मेल के माध्यम से जिला कल्याण पदाधिकारी के कार्यालय में उपलब्ध कराने का निदेश सभी थाना प्रभारी को दिया।
◆ चार्जशीट हेतु लंबित सभी मामलों में प्राथमिकता से चार्जशीट दाखिल करने का निदेश दिया गया मुआवजे के द्वितीय किश्त की राशि का भुगतान किया जा सके।
◆ इस अधिनियम के तहत गवाहों को न्यायालय आने जाने के लिए यात्रा भत्ता दिये जाने का प्रावधान है। सभी उपयुक्त मामलों में नियमानुसार यात्रा भत्ता का भुगतान सुनिश्चित करने का निदेश दिया गया। 
  ◆ बैठक में उपविकास आयुक्त , अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय, जिला कल्याण पदाधिकारी, समिति के अन्य सदस्यगण तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न थाना प्रभारी जुड़े थे।
#SCSTAtrocityAct
#MonitoringCommittee 
#meeting 
#DM
#saran 
#chapra 
SC&ST Welfare Dept. of Bihar 
Information & Public Relations Department, Government of Bihar

◆◆ *अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति अत्याचार (निवारण) अधिनियम के तहत जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक* छपरा, 09 जून 2026 ◆ जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आज अनुसूचित जाति/ जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत जिला सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक आहुत की गई। ◆ जिला कल्याण पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि वर्ष 2023 से 2026 तक इस अधिनियम के तहत दर्ज कुल 1100 कांडों में से 1055 मामलों में पीड़ित/आश्रित को देय मुआवजे के प्रथम क़िस्त की राशि का भुगतान किया गया है। 25 मामलों में संधि/सुलह की गई है। शेष 20 मामलों में प्रथम क़िस्त के मुआवजे का त्वरित भुगतान की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। ◆ इस अधिनियम के तहत दर्ज मृत्यु के मामलों में 57 निकटम आश्रितों को नियमानुसार पेंशन का भुगतान किया जा रहा है।सभी का माह अप्रैल 2026 तक के पेंशन का भुगतान किया जा चुका है। चार आश्रितों को सरकारी नौकरी दी गई है। एक अन्य मामले में आश्रित को नौकरी देने हेतु कार्रवाई प्रक्रियाधीन है, जिसे अविलंब पूरा करने का निदेश दिया गया। ◆ जिलाधिकारी ने इस एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज होने पर इसकी एक प्रति अविलंब ई-मेल के माध्यम से जिला कल्याण पदाधिकारी के कार्यालय में उपलब्ध कराने का निदेश सभी थाना प्रभारी को दिया। ◆ चार्जशीट हेतु लंबित सभी मामलों में प्राथमिकता से चार्जशीट दाखिल करने का निदेश दिया गया मुआवजे के द्वितीय किश्त की राशि का भुगतान किया जा सके। ◆ इस अधिनियम के तहत गवाहों को न्यायालय आने जाने के लिए यात्रा भत्ता दिये जाने का प्रावधान है। सभी उपयुक्त मामलों में नियमानुसार यात्रा भत्ता का भुगतान सुनिश्चित करने का निदेश दिया गया। ◆ बैठक में उपविकास आयुक्त , अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय, जिला कल्याण पदाधिकारी, समिति के अन्य सदस्यगण तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न थाना प्रभारी जुड़े थे। #SCSTAtrocityAct #MonitoringCommittee #meeting #DM #saran #chapra SC&ST Welfare Dept. of Bihar Information & Public Relations Department, Government of Bihar

Saharsa, Bihar | Jun 9, 2026

◆◆ *संभावित बाढ़ एवं जलजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर जिला स्तरीय तैयारियों की समीक्षा, सभी विभागों को अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश*

छपरा, 09 जून 2026

◆ संभावित बाढ़ एवं उसके उपरांत उत्पन्न होने वाली जलजनित बीमारियों की रोकथाम तथा राहत एवं बचाव कार्यों की समुचित तैयारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित समिति की बैठक आज जिलाधिकारी सारण श्री वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
◆ बैठक में जिले के सभी बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पूर्व तैयारी, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की सुदृढ़ व्यवस्था तथा तटबंधों की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की गई।
◆ बैठक में जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि जिले के सभी 17 संभावित बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों का तत्काल आकलन कर आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए सभी आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं एवं चिकित्सा सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण पूर्व से ही सुनिश्चित किया जाए।
◆ जिलाधिकारी ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि हैलोजन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर, चूना (लाइम पाउडर), सर्पदंश उपचार हेतु एंटी स्नेक वेनम सहित सभी आवश्यक दवाओं एवं चिकित्सा सामग्रियों की पर्याप्त मात्रा प्रत्येक बाढ़ संभावित प्रखंड में उपलब्ध रहे। साथ ही सभी स्वास्थ्य संस्थानों एवं भंडारों में उपलब्ध दवाओं का भौतिक सत्यापन (स्टॉक वेरिफिकेशन) अग्रिम रूप से पूर्ण कर लिया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसी प्रकार की कमी उत्पन्न न हो।
◆ बैठक में संभावित बाढ़ की स्थिति में चिकित्सा सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु बोट एम्बुलेंस की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि बोट एम्बुलेंस के संचालन हेतु उपयुक्त स्थानों का चयन पूर्व में ही कर लिया जाए तथा आवश्यकतानुसार चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल कर्मियों की प्रतिनियुक्ति भी समय रहते सुनिश्चित कर ली जाए, ताकि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी रूप से उपलब्ध कराई जा सकें।
◆ जिलाधिकारी ने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिये आवश्यक संख्या में लाइफ जैकेट की खरीद एवं उपलब्धता समय पर सुनिश्चित करने का निदेश दिया  तथा उन्हें विभिन्न बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील प्रखंडों में पूर्व से उपलब्ध कराने को कहा।
◆ बैठक में तटबंधों की सुरक्षा व्यवस्था की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल को निर्देश दिया कि सभी चिन्हित संवेदनशील एवं बाढ़ प्रभावित स्थलों पर जियो बैग, बालू, रस्सी सहित आवश्यक फ्लड फाइटिंग सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण अग्रिम रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए सभी आवश्यक संसाधन पहले से उपलब्ध रहना आवश्यक है।
◆ जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि तटबंधों की सुरक्षा की नियमित निगरानी की जाए तथा किसी भी प्रकार की क्षति, रिसाव अथवा कमजोर बिंदुओं की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने संबंधित अभियंताओं को संवेदनशील स्थलों का नियमित निरीक्षण करने तथा सतत मॉनिटरिंग बनाए रखने का निर्देश दिया।
◆ जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ के दौरान सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने तथा जलजनित रोगों की रोकथाम हेतु सभी आवश्यक कदम पूर्व से सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ पूर्व तैयारियों में किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी।
◆ बैठक में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था), सिविल सर्जन, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), कार्यपालक अभियंता बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, कार्यपालक अभियंता लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग सहित विभिन्न विभागों से संबंधित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
#FloodPrevention 
#meeting
#DM 
#saran 
#chapra 
Information & Public Relations Department, Government of Bihar

◆◆ *संभावित बाढ़ एवं जलजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर जिला स्तरीय तैयारियों की समीक्षा, सभी विभागों को अग्रिम तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश* छपरा, 09 जून 2026 ◆ संभावित बाढ़ एवं उसके उपरांत उत्पन्न होने वाली जलजनित बीमारियों की रोकथाम तथा राहत एवं बचाव कार्यों की समुचित तैयारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित समिति की बैठक आज जिलाधिकारी सारण श्री वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित की गई। ◆ बैठक में जिले के सभी बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पूर्व तैयारी, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाओं की सुदृढ़ व्यवस्था तथा तटबंधों की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा की गई। ◆ बैठक में जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि जिले के सभी 17 संभावित बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में उपलब्ध चिकित्सा संसाधनों का तत्काल आकलन कर आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए सभी आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं एवं चिकित्सा सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण पूर्व से ही सुनिश्चित किया जाए। ◆ जिलाधिकारी ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि हैलोजन टैबलेट, ब्लीचिंग पाउडर, चूना (लाइम पाउडर), सर्पदंश उपचार हेतु एंटी स्नेक वेनम सहित सभी आवश्यक दवाओं एवं चिकित्सा सामग्रियों की पर्याप्त मात्रा प्रत्येक बाढ़ संभावित प्रखंड में उपलब्ध रहे। साथ ही सभी स्वास्थ्य संस्थानों एवं भंडारों में उपलब्ध दवाओं का भौतिक सत्यापन (स्टॉक वेरिफिकेशन) अग्रिम रूप से पूर्ण कर लिया जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसी प्रकार की कमी उत्पन्न न हो। ◆ बैठक में संभावित बाढ़ की स्थिति में चिकित्सा सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु बोट एम्बुलेंस की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि बोट एम्बुलेंस के संचालन हेतु उपयुक्त स्थानों का चयन पूर्व में ही कर लिया जाए तथा आवश्यकतानुसार चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल कर्मियों की प्रतिनियुक्ति भी समय रहते सुनिश्चित कर ली जाए, ताकि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावी रूप से उपलब्ध कराई जा सकें। ◆ जिलाधिकारी ने आपदा के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिये आवश्यक संख्या में लाइफ जैकेट की खरीद एवं उपलब्धता समय पर सुनिश्चित करने का निदेश दिया तथा उन्हें विभिन्न बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील प्रखंडों में पूर्व से उपलब्ध कराने को कहा। ◆ बैठक में तटबंधों की सुरक्षा व्यवस्था की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कार्यपालक अभियंता, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल को निर्देश दिया कि सभी चिन्हित संवेदनशील एवं बाढ़ प्रभावित स्थलों पर जियो बैग, बालू, रस्सी सहित आवश्यक फ्लड फाइटिंग सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण अग्रिम रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि संभावित आपदा की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए सभी आवश्यक संसाधन पहले से उपलब्ध रहना आवश्यक है। ◆ जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि तटबंधों की सुरक्षा की नियमित निगरानी की जाए तथा किसी भी प्रकार की क्षति, रिसाव अथवा कमजोर बिंदुओं की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने संबंधित अभियंताओं को संवेदनशील स्थलों का नियमित निरीक्षण करने तथा सतत मॉनिटरिंग बनाए रखने का निर्देश दिया। ◆ जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि संभावित बाढ़ के दौरान सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने तथा जलजनित रोगों की रोकथाम हेतु सभी आवश्यक कदम पूर्व से सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ पूर्व तैयारियों में किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी। ◆ बैठक में उप विकास आयुक्त, अपर समाहर्ता (विधि-व्यवस्था), सिविल सर्जन, पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), कार्यपालक अभियंता बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, कार्यपालक अभियंता लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग सहित विभिन्न विभागों से संबंधित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। #FloodPrevention #meeting #DM #saran #chapra Information & Public Relations Department, Government of Bihar

Saharsa, Bihar | Jun 9, 2026

सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूरे, गर्भवती महिलाओं की जांच और जागरूकता के लिए जिलेभर में विशेष शिविर
• “सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माँ, सशक्त भारत” थीम के साथ स्वास्थ्य केंद्रों पर हुआ विशेष आयोजन
• उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान और समय पर इलाज से मातृ मृत्यु दर में कमी लाने पर जोर
छपरा। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच और समय पर विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने मंगलवार को अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर सारण जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, अनुमंडलीय अस्पतालों और जिला अस्पतालों में विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर, परामर्श सत्र और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान की इस वर्ष की थीम “प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष : सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माँ, सशक्त भारत” रखी गई है।
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि पिछले एक दशक में इस अभियान ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श तथा जरूरत पड़ने पर बेहतर स्वास्थ्य संस्थानों में रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह की समय पर पहचान
डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि नियमित एएनसी (Antenatal Check-up) जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कुपोषण और अन्य जटिलताओं की पहचान आसानी से हो जाती है। समय पर उपचार मिलने से प्रसव संबंधी जोखिम कम होते हैं और नवजात शिशु के स्वास्थ्य में भी सुधार आता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में भी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लगे विशेष शिविर
अभियान की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पहली तिमाही की गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष शिविर लगाए गए। यहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण, रक्त जांच, रक्तचाप मापन, वजन जांच और आवश्यक परामर्श दिया गया। वहीं दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती महिलाओं को अनुमंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच और परामर्श उपलब्ध कराया गया।
प्रसव के बाद 45 दिनों तक होगी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान कर प्रसव के बाद 45 दिनों तक विशेष निगरानी की जाएगी। स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से इन महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखेंगे ताकि प्रसवोत्तर जटिलताओं को रोका जा सके।
गर्भावस्था में नियमित जांच बेहद जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, संक्रमण और एनीमिया शामिल हैं। इनमें से अधिकांश मामलों को नियमित जांच और समय पर इलाज से रोका जा सकता है। सुरक्षित मातृत्व केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार से ही स्वस्थ माँ और स्वस्थ शिशु का सपना साकार किया जा सकता है।
#SafeMotherhood 
#Motherchildcare
#saran 
#chapra 
Bihar Health Department 
Information & Public Relations Department, Government of Bihar

सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूरे, गर्भवती महिलाओं की जांच और जागरूकता के लिए जिलेभर में विशेष शिविर • “सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माँ, सशक्त भारत” थीम के साथ स्वास्थ्य केंद्रों पर हुआ विशेष आयोजन • उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान और समय पर इलाज से मातृ मृत्यु दर में कमी लाने पर जोर छपरा। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच और समय पर विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने मंगलवार को अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर सारण जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, अनुमंडलीय अस्पतालों और जिला अस्पतालों में विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर, परामर्श सत्र और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान की इस वर्ष की थीम “प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष : सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माँ, सशक्त भारत” रखी गई है। सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि पिछले एक दशक में इस अभियान ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श तथा जरूरत पड़ने पर बेहतर स्वास्थ्य संस्थानों में रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह की समय पर पहचान डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि नियमित एएनसी (Antenatal Check-up) जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कुपोषण और अन्य जटिलताओं की पहचान आसानी से हो जाती है। समय पर उपचार मिलने से प्रसव संबंधी जोखिम कम होते हैं और नवजात शिशु के स्वास्थ्य में भी सुधार आता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में भी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लगे विशेष शिविर अभियान की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पहली तिमाही की गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष शिविर लगाए गए। यहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण, रक्त जांच, रक्तचाप मापन, वजन जांच और आवश्यक परामर्श दिया गया। वहीं दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती महिलाओं को अनुमंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच और परामर्श उपलब्ध कराया गया। प्रसव के बाद 45 दिनों तक होगी निगरानी स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान कर प्रसव के बाद 45 दिनों तक विशेष निगरानी की जाएगी। स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से इन महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखेंगे ताकि प्रसवोत्तर जटिलताओं को रोका जा सके। गर्भावस्था में नियमित जांच बेहद जरूरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, संक्रमण और एनीमिया शामिल हैं। इनमें से अधिकांश मामलों को नियमित जांच और समय पर इलाज से रोका जा सकता है। सुरक्षित मातृत्व केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार से ही स्वस्थ माँ और स्वस्थ शिशु का सपना साकार किया जा सकता है। #SafeMotherhood #Motherchildcare #saran #chapra Bihar Health Department Information & Public Relations Department, Government of Bihar

Saharsa, Bihar | Jun 9, 2026

मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्यपालकों की सहायता हेतु चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी

मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्यपालकों की सहायता हेतु चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी

Saharsa, Bihar | Jun 9, 2026

◆◆ *शहरी नदी प्रबंधन योजना (Urban River Management Plan) के प्रारूप को अंतिम रूप देने हेतु बहु-हितधारकों की बैठक आयोजित*
छपरा, 09 जून 2026

 ◆ जिलाधिकारी सारण श्री वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आज शहरी नदी प्रबंधन योजना (Urban River Management Plan-URMP) के प्रारूप को अंतिम रूप देने हेतु एक महत्वपूर्ण बहु-हितधारक बैठक आयोजित की गई। ◆ बैठक में सारण के सांसद श्री राजीव प्रताप रूडी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े, जबकि महापौर छपरा नगर निगम, नगर आयुक्त, जिले के विभिन्न नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी, नगर निगम के पदाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।
◆ यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga-NMCG) द्वारा संचालित की जा रही है। 
◆ परियोजना के प्रथम चरण में बिहार के गंगा बेसिन क्षेत्र के छह शहरों का चयन किया गया है, जिनमें छपरा भी शामिल है।
◆ योजना के तकनीकी एवं संस्थागत क्रियान्वयन हेतु राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (National Institute of Urban Affairs-NIUA) को दायित्व सौंपा गया है। एनआईयूए द्वारा विस्तृत योजना निर्माण के लिए विशेषज्ञ परामर्शी संस्थाओं  की सेवाएं ली गई हैं, जो छपरा नगर क्षेत्र के लिए समग्र शहरी नदी प्रबंधन योजना तैयार कर रही हैं।
◆ बैठक में प्रस्तावित योजना के विभिन्न घटकों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इनमें नदी तट (Riverfront) का सुनियोजित विकास, विभिन्न गतिविधियों के लिए क्षेत्र निर्धारण (Zonation), सौंदर्यपरक बाढ़ सुरक्षा दीवार (Aesthetic Flood Wall) का निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ करना, विकेन्द्रीकृत गीले कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था विकसित करना तथा फीकल स्लज (Faecal Sludge) के वैज्ञानिक निस्तारण एवं प्रसंस्करण हेतु उपयुक्त संरचनाओं की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
◆ बैठक में यह भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि नदियों के संरक्षण एवं स्वच्छता के लिए केवल आधारभूत संरचनाओं का विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन भी अत्यंत आवश्यक है। इस उद्देश्य से जन-जागरूकता एवं नागरिक सहभागिता को योजना का महत्वपूर्ण अंग बनाया गया है, ताकि लोगों में नदियों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार एवं संरक्षण की भावना विकसित हो सके।
◆ सारण के सांसद श्री राजीव प्रताप रूडी ने ऑनलाइन माध्यम से बैठक में भाग लेते हुए छपरा शहर एवं इसकी नदी तटीय परिस्थितियों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने नदी संरक्षण, शहरी विकास तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजना निर्माण पर बल दिया तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया।
◆ जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव ने परामर्शी संस्थाओं को निर्देश दिया कि योजना में छपरा नगर क्षेत्र के प्रस्तावित विस्तार (Planning Area Expansion) को समुचित रूप से शामिल किया जाए। साथ ही, भविष्य में प्रस्तावित विभिन्न विकास परियोजनाओं, विशेषकर इंटर लिंकिंग ऑफ रिवर्स से संबंधित संभावित योजनाओं को भी ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ योजना तैयार की जाए, ताकि आने वाले वर्षों में भी यह योजना प्रासंगिक एवं प्रभावी बनी रहे।
◆ बैठक के दौरान प्राप्त सुझावों एवं तकनीकी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा संबंधित एजेंसियों को आवश्यक संशोधन एवं परिशोधन करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी हितधारकों के सुझावों, स्थानीय आवश्यकताओं एवं तकनीकी मानकों को समाहित करते हुए छपरा शहरी नदी प्रबंधन योजना को अंतिम स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि योजना के अंतिम रूप लेने के पश्चात इसे आगे की स्वीकृति एवं क्रियान्वयन की प्रक्रिया हेतु कार्रवाई की जायेगी जिससे भविष्य में छपरा शहर में नदी संरक्षण, पर्यावरणीय सुधार, स्वच्छता प्रबंधन तथा सतत शहरी विकास को नई दिशा मिल सकेगी।
◆ यह योजना न केवल नदी तटों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, बल्कि छपरा शहर को पर्यावरणीय रूप से अधिक सुदृढ़, स्वच्छ एवं नागरिकों के लिए अनुकूल बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी।
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Information & Public Relations Department, Government of Bihar

◆◆ *शहरी नदी प्रबंधन योजना (Urban River Management Plan) के प्रारूप को अंतिम रूप देने हेतु बहु-हितधारकों की बैठक आयोजित* छपरा, 09 जून 2026 ◆ जिलाधिकारी सारण श्री वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आज शहरी नदी प्रबंधन योजना (Urban River Management Plan-URMP) के प्रारूप को अंतिम रूप देने हेतु एक महत्वपूर्ण बहु-हितधारक बैठक आयोजित की गई। ◆ बैठक में सारण के सांसद श्री राजीव प्रताप रूडी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े, जबकि महापौर छपरा नगर निगम, नगर आयुक्त, जिले के विभिन्न नगर निकायों के कार्यपालक पदाधिकारी, नगर निगम के पदाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे। ◆ यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga-NMCG) द्वारा संचालित की जा रही है। ◆ परियोजना के प्रथम चरण में बिहार के गंगा बेसिन क्षेत्र के छह शहरों का चयन किया गया है, जिनमें छपरा भी शामिल है। ◆ योजना के तकनीकी एवं संस्थागत क्रियान्वयन हेतु राष्ट्रीय शहरी कार्य संस्थान (National Institute of Urban Affairs-NIUA) को दायित्व सौंपा गया है। एनआईयूए द्वारा विस्तृत योजना निर्माण के लिए विशेषज्ञ परामर्शी संस्थाओं की सेवाएं ली गई हैं, जो छपरा नगर क्षेत्र के लिए समग्र शहरी नदी प्रबंधन योजना तैयार कर रही हैं। ◆ बैठक में प्रस्तावित योजना के विभिन्न घटकों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इनमें नदी तट (Riverfront) का सुनियोजित विकास, विभिन्न गतिविधियों के लिए क्षेत्र निर्धारण (Zonation), सौंदर्यपरक बाढ़ सुरक्षा दीवार (Aesthetic Flood Wall) का निर्माण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ करना, विकेन्द्रीकृत गीले कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था विकसित करना तथा फीकल स्लज (Faecal Sludge) के वैज्ञानिक निस्तारण एवं प्रसंस्करण हेतु उपयुक्त संरचनाओं की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। ◆ बैठक में यह भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया कि नदियों के संरक्षण एवं स्वच्छता के लिए केवल आधारभूत संरचनाओं का विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि नागरिकों के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन भी अत्यंत आवश्यक है। इस उद्देश्य से जन-जागरूकता एवं नागरिक सहभागिता को योजना का महत्वपूर्ण अंग बनाया गया है, ताकि लोगों में नदियों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार एवं संरक्षण की भावना विकसित हो सके। ◆ सारण के सांसद श्री राजीव प्रताप रूडी ने ऑनलाइन माध्यम से बैठक में भाग लेते हुए छपरा शहर एवं इसकी नदी तटीय परिस्थितियों से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने नदी संरक्षण, शहरी विकास तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजना निर्माण पर बल दिया तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया। ◆ जिलाधिकारी श्री वैभव श्रीवास्तव ने परामर्शी संस्थाओं को निर्देश दिया कि योजना में छपरा नगर क्षेत्र के प्रस्तावित विस्तार (Planning Area Expansion) को समुचित रूप से शामिल किया जाए। साथ ही, भविष्य में प्रस्तावित विभिन्न विकास परियोजनाओं, विशेषकर इंटर लिंकिंग ऑफ रिवर्स से संबंधित संभावित योजनाओं को भी ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ योजना तैयार की जाए, ताकि आने वाले वर्षों में भी यह योजना प्रासंगिक एवं प्रभावी बनी रहे। ◆ बैठक के दौरान प्राप्त सुझावों एवं तकनीकी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई तथा संबंधित एजेंसियों को आवश्यक संशोधन एवं परिशोधन करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी हितधारकों के सुझावों, स्थानीय आवश्यकताओं एवं तकनीकी मानकों को समाहित करते हुए छपरा शहरी नदी प्रबंधन योजना को अंतिम स्वरूप प्रदान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना के अंतिम रूप लेने के पश्चात इसे आगे की स्वीकृति एवं क्रियान्वयन की प्रक्रिया हेतु कार्रवाई की जायेगी जिससे भविष्य में छपरा शहर में नदी संरक्षण, पर्यावरणीय सुधार, स्वच्छता प्रबंधन तथा सतत शहरी विकास को नई दिशा मिल सकेगी। ◆ यह योजना न केवल नदी तटों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, बल्कि छपरा शहर को पर्यावरणीय रूप से अधिक सुदृढ़, स्वच्छ एवं नागरिकों के लिए अनुकूल बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी। #urbanrivermanagementplan #NMCG #masterplan #chapra #saran #meeting #DM Information & Public Relations Department, Government of Bihar

Saharsa, Bihar | Jun 9, 2026

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