बहुत दिनों बाद, कुछ इस तरह से, मंच पर शिरकत हुई
<nis:link nis:type=tag nis:id=कवितापाठ nis:value=कवितापाठ nis:enabled=true nis:link/> मैं हूँ माटी का दिया, काली रात का पिया और चाय में दूध कम चीनी ज़्यादा............... और
थोड़ी नौटंकी भी....................... <nis:link nis:type=tag nis:id=बीसलपुर nis:value=बीसलपुर nis:enabled=true nis:link/> के प्यारेे स्रोतागड़ों का बेहद शुकिृया