#चौपाल :- राजकीय संस्कृत महाविद्यालय सरैन में संस्कृत सप्ताह समापन समारोह का आयोजन
महाविद्यालय सरैन में ‘संस्कृत सप्ताह समापन समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। इस समारोह में आइ.जी.एम्.सी. शिमला (IGMC Shimla) के यूरोलॉजी विभाग (Urology Department) के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ आचार्य
डॉ.एम.एल.धर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी श्विद्याधर भी विशेष रूप से मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि महोदय ने संस्कृत के महत्त्व के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संस्कृत शिक्षा का महत्त्व: उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पहली कक्षा से अंग्रेजी पढ़ाई जा रही है, उसी प्रकार संस्कृत भी पढ़ाई जा सकती है। यदि बच्चों को शुरुआती स्तर से ही संस्कृत सिखाई जाए, तो वे इस प्राचीन भाषा को आसानी से समझ और सीख सकते हैं। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान और संस्कृति को समझने का प्रमुख माध्यम है। उन्होंने बताया कि संस्कृत और विज्ञान आपस में गहरे जुड़े हुए हैं।
शारीरिक स्वास्थ्य और आयुर्वेद: डॉ. धर ने एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक के माध्यम से शरीर के अनमोल महत्त्व को समझाया:
पुनर्वित्तं पुनर्मित्रं पुनर्भार्या पुनर्मही।
एतत्सर्वं पुनर्लभ्यं न शरीरं पुनः पुनः॥
उन्होंने जठराग्नि और पाचन प्रक्रिया के बारे में बताते हुए कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए पाचन तन्त्र का दुरुस्त रहना बेहद जरूरी है। इसके अलावा उन्होंने श्वसन प्रक्रिया, सांस लेने और छोड़ने के समय वायु के आदान-प्रदान और हृदय की कार्यप्रणाली के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी।
मानसिक स्वास्थ्य व जीवनशैली: विद्यार्थियों को तनावमुक्त रहने, सकारात्मक सोच अपनाने, मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग न करने और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देने की सलाह दी गई। साथ ही, उन्होंने सही समय पर विवाह और स्वस्थ पारिवारिक जीवन के महत्त्व पर भी अपने विचार साझा किए।
समारोह का समापन: मुख्य अतिथि महोदय ने संदेश दिया कि स्वस्थ शरीर, शान्त मन, सही खान-पान और अनुशासित जीवनशैली को अपनाकर ही एक बेहतर समाज का निर्माण किया जा सकता है। अन्त में, महाविद्यालय के प्राचार्य एवं आचार्यों ने मुख्य अतिथि का आभार व्यक्त किया और इसी के साथ समाप्त हुआ..!