दिल में जुनून और मन में आस्था हो, तो कोई मंजिल मुश्किल नहीं!
ये कहानी है अनिल भोला की, जो दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। 3 अगस्त को हरिद्वार से गंगाजल लेकर निकले अनिल ने कठिन रास्तों, दर्द और थकान के बावजूद कदम नहीं रोके। हौसले के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ गई और आस्था बन गई उनकी सबसे बड़ी ताकत।