फतेहपुर के बहुचर्चित मंदिर-मकबरा विवाद में बड़ा न्यायिक मोड़, मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज
एडीजे प्रथम की अदालत का अहम फैसला, मूल वाद की सुनवाई जारी रहेगी; 13 सितंबर तय अगली तारीख
अदालत के आदेश के बाद दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, प्रशासन से शांति बनाए रखने की अपील
✒️रिपोर्ट अंकित मिश्रा के साथ अजय श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद के आबूनगर रेडइया स्थित बहुचर्चित मंदिर-मकबरा भूमि विवाद में अदालत से महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। एडीजे प्रथम राजकिशोर की अदालत ने मुस्लिम पक्ष द्वारा रेस्टोरेशन आदेश के विरुद्ध दायर अपील को खारिज कर दिया है। अदालत के आदेश के अनुसार अब मामले की सुनवाई मूल वाद पर जारी रहेगी। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 13 सितंबर को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आकांक्षा मिश्रा की अदालत में निर्धारित की गई है। मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अभी आना शेष है।
फतेहपुर। जिले के आबूनगर रेडइया स्थित बहुचर्चित मंदिर-मकबरा भूमि विवाद में बुधवार को महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश सामने आया। एडीजे प्रथम राजकिशोर की अदालत ने मुस्लिम पक्ष द्वारा रेस्टोरेशन आदेश के खिलाफ दाखिल अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वादी पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया जाना न्यायसंगत है और इस स्तर पर रेस्टोरेशन आदेश में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता।
इस आदेश के साथ अब विवादित प्रकरण की सुनवाई मूल वाद के रूप में आगे जारी रहेगी। न्यायालय ने अगली सुनवाई 13 सितंबर को सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आकांक्षा मिश्रा की अदालत में निर्धारित की है।
वादी पक्ष के अधिवक्ता रामजी सहाय के अनुसार वर्ष 2010 में पारित एक आदेश में विवादित भूमि को "मकबरा मंगी" के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। वादी पक्ष का दावा है कि वह आदेश एकतरफा था और उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। इसके बाद रेस्टोरेशन प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया, जिसे अदालत ने ₹5,000 की लागत के साथ स्वीकार करते हुए नियमित सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया था।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने जिला जज की अदालत में अपील दायर की थी, जिसे बाद में एडीजे प्रथम की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपील खारिज करते हुए कहा कि न्याय के सिद्धांतों के अनुसार वादी पक्ष को सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।
वादी पक्ष के मुख्य पैरोकार विजय प्रताप सिंह का दावा है कि विवादित स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण एवं भगवान शिव का प्राचीन मंदिर स्थित है। उनके अनुसार पुराने राजस्व अभिलेखों में मंदिर का उल्लेख मिलता है तथा भवन पर कमल की आकृतियां, कलश और घंटियों जैसे स्थापत्य चिन्ह मौजूद हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 1970 में उनके पिता राम नरेश सिंह ने यह भूमि मानसिंह परिवार से क्रय की थी।
दूसरी ओर, मुतवल्ली मोहम्मद अनीस एवं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह स्थल लगभग 300 से 500 वर्ष पुराना ऐतिहासिक मकबरा है और सरकारी अभिलेखों में लंबे समय से "मकबरा मंगी" के नाम दर्ज है।
गौरतलब है कि 11 अगस्त 2025 को विवादित स्थल पर पूजा और ध्वजारोहण के आह्वान के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए विवादित स्थल पर अस्थायी पुलिस चौकी स्थापित की थी और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
अदालत के आदेश के बाद भाजपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष मुखलाल पाल ने कहा कि वे न्यायालय के निर्णय का सम्मान करते हैं और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास रखते हैं। वहीं, विश्व हिंदू परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष वीरेंद्र पाण्डेय ने कहा कि भविष्य की गतिविधियां प्रशासन और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ही तय की जाएंगी।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2010 के आदेश और उसके बाद दायर रेस्टोरेशन आवेदन को लेकर विवाद।
मुस्लिम पक्ष ने रेस्टोरेशन आदेश को चुनौती दी थी।
एडीजे प्रथम की अदालत ने अपील खारिज कर मूल वाद की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया।
अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।
विवादित स्थल की अंतिम स्वामित्व स्थिति पर अभी कोई अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं आया है।
यह मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है। अदालत के ताजा आदेश का संबंध सुनवाई की प्रक्रिया से है, न कि विवादित संपत्ति के अंतिम स्वामित्व या अधिकारों के निर्धारण से। ऐसे में सभी पक्षों से अपेक्षा है कि वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करें और किसी भी प्रकार की भ्रामक अथवा भड़काऊ जानकारी प्रसारित करने से बचें।
🟥 ND NEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा की अपील
एनडी न्यूज़ सभी नागरिकों से अपील करता है कि धार्मिक एवं संवेदनशील मामलों में संयम, शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखें। न्यायालय के आदेशों का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक दायित्व है। किसी भी अपुष्ट सूचना, अफवाह या भड़काऊ संदेश को सोशल मीडिया पर साझा न करें। प्रशासन से अनुरोध है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ दोनों पक्षों के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान सुनिश्चित करे।
जनहित सुझाव
न्यायालय के अंतिम निर्णय का सम्मान करें।
अफवाहों और भड़काऊ पोस्ट से बचें।
केवल आधिकारिक एवं सत्यापित जानकारी पर भरोसा करें।
धार्मिक सद्भाव और भाईचारा बनाए रखें।
किसी भी विवाद की स्थिति में कानून का सहारा लें, स्वयं निर्णय न करें।
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मुख्य संपादक / संस्थापक: राजन सिंह हाड़ा
सह-संपादक: शालिनी सिंह भदौरिया
✒️ रिपोर्ट: सहयोगी शिवा गुप्ता के साथ जिला ब्यूरो अजय श्रीवास्तव
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