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‘माई री मैं का से कहूं’ के सफल मंचन ने दर्शकों को किया भाव-विभोर कुल्लू। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल द्वारा आयोजित ‘हिम रंग षष्ठी’ ग्रीष्मकालीन नाट्य समारोह 2026 का शुभारंभ आज अटल सदन के अंतरंग ऑडिटोरियम में नाटक *‘माई री मैं का से कहूँ’* के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ। लगभग खचाखच भरे सभागार में प्रस्तुत इस नाटक को दर्शकों से उत्साहपूर्ण, भावनात्मक और सराहनापूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। इस र्कायक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि, अतिरिक्त उपायुक्त अश्वनी कुमार ने पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल द्वारा 18 से 27 जून 2026 तक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, धर्मशाला और शिमला में आयोजित इस विशेष नाट्य यात्रा के अंतर्गत *‘माई री मैं का से कहूँ’*, *‘बाबूजी’*, *‘ताजमहल का टेंडर’* तथा *‘अक्स तमाशा’* जैसी चर्चित प्रस्तुतियां मंचित की जाएँगी। सभी प्रस्तुतियों में प्रवेश निःशुल्क है। राजस्थान के प्रख्यात साहित्यकार विजयदान देथा की प्रसिद्ध कहानी *‘दुविधा’* पर आधारित *‘माई री मैं का से कहूँ’* स्त्री की इच्छा, संवेदना, स्वायत्तता और सामाजिक मर्यादाओं के बीच चलने वाले द्वंद्व की मार्मिक कथा है। यह नाटक समाज की उस विडम्बना को उजागर करता है जो समानता और प्रगतिशीलता की बात तो करता है, किंतु स्त्री की स्वतंत्र इच्छा को आज भी सीमित दायरों में बांधकर देखता है। नाटक की कथा एक नवविवाहिता स्त्री के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका पति विवाह के तुरंत बाद व्यापार के सिलसिले में घर से दूर चला जाता है। उसके जाने के बाद एक भूत, जो उस स्त्री से मोहित हो जाता है, पति का रूप धारण कर उसके जीवन में प्रवेश करता है। वास्तविक और अलौकिक के बीच की रेखाएँ धीरे-धीरे धुंधली होने लगती हैं और स्त्री भावनात्मक तथा नैतिक दुविधाओं में उलझ जाती है। कथा के माध्यम से स्त्री की इच्छाओं, उसके अधिकारों, सामाजिक बंधनों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रश्नों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है।

Kangra, Kangra | Jun 18, 2026

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‘माई री मैं का से कहूं’ के सफल मंचन ने दर्शकों को किया भाव-विभोर कुल्लू। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल द्वारा आयोजित ‘हिम रंग षष्ठी’ ग्रीष्मकालीन नाट्य समारोह 2026 का शुभारंभ आज अटल सदन के अंतरंग ऑडिटोरियम में नाटक *‘माई री मैं का से कहूँ’* के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ। लगभग खचाखच भरे सभागार में प्रस्तुत इस नाटक को दर्शकों से उत्साहपूर्ण, भावनात्मक और सराहनापूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। इस र्कायक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि, अतिरिक्त उपायुक्त अश्वनी कुमार ने पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल द्वारा 18 से 27 जून 2026 तक हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, धर्मशाला और शिमला में आयोजित इस विशेष नाट्य यात्रा के अंतर्गत *‘माई री मैं का से कहूँ’*, *‘बाबूजी’*, *‘ताजमहल का टेंडर’* तथा *‘अक्स तमाशा’* जैसी चर्चित प्रस्तुतियां मंचित की जाएँगी। सभी प्रस्तुतियों में प्रवेश निःशुल्क है। राजस्थान के प्रख्यात साहित्यकार विजयदान देथा की प्रसिद्ध कहानी *‘दुविधा’* पर आधारित *‘माई री मैं का से कहूँ’* स्त्री की इच्छा, संवेदना, स्वायत्तता और सामाजिक मर्यादाओं के बीच चलने वाले द्वंद्व की मार्मिक कथा है। यह नाटक समाज की उस विडम्बना को उजागर करता है जो समानता और प्रगतिशीलता की बात तो करता है, किंतु स्त्री की स्वतंत्र इच्छा को आज भी सीमित दायरों में बांधकर देखता है। नाटक की कथा एक नवविवाहिता स्त्री के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका पति विवाह के तुरंत बाद व्यापार के सिलसिले में घर से दूर चला जाता है। उसके जाने के बाद एक भूत, जो उस स्त्री से मोहित हो जाता है, पति का रूप धारण कर उसके जीवन में प्रवेश करता है। वास्तविक और अलौकिक के बीच की रेखाएँ धीरे-धीरे धुंधली होने लगती हैं और स्त्री भावनात्मक तथा नैतिक दुविधाओं में उलझ जाती है। कथा के माध्यम से स्त्री की इच्छाओं, उसके अधिकारों, सामाजिक बंधनों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के प्रश्नों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। - Kangra News