#बालाघाट
डीएसआर (बोवार) पद्धति से धान की बुवाई को मिला बढ़ावा,
किसान नेता महेश शरणागत ने किसानों से की डीएसआर पद्धति अपनाने की अपील
बालाघाट जिले में धान की खेती में आधुनिक एवं जल संरक्षण आधारित तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 26 जून को बालाघाट विकासखंड के ग्राम चीचगांव में जनपद सदस्य, एकता संघ जिला बालाघाट के अध्यक्ष एवं किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष महेश शरणागत के कृषि खेत में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) अर्थात बोवार पद्धति से सुपर सीडर मशीन द्वारा धान की बुवाई की गई।
इस अवसर पर किसान नेता महेश शरणागत ने जिले के किसानों से अपील करते हुए कहा कि पहले अधिकांश किसान छिड़काव या बोवार पद्धति से धान की खेती करते थे। उस समय खेतों की मेड़ों में रुका पानी धीरे-धीरे जमीन में रिसकर भूजल स्तर को बनाए रखता था, जिससे गांवों के कुओं और बोरवेल में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहता था। साथ ही खेतों की मिट्टी भी भुरभुरी एवं उपजाऊ बनी रहती थी।
उन्होंने कहा कि रोपा पद्धति के बढ़ते प्रचलन के कारण खेतों में अत्यधिक कीचड़ किया जाता है, जिससे मेड़ों का पानी जमीन में समाहित होने के बजाय सीधे नदी-नालों में बह जाता है। इसका परिणाम यह हुआ है कि भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है तथा खेतों की मिट्टी कठोर होती जा रही है। इसके कारण उतेरा एवं दलहनी फसलें जैसे उड़द, अलसी, पोपट एवं चना का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है।
श्री शरणागत ने किसानों से डीएसआर (बोवार) पद्धति अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इस तकनीक से खेती की लागत कम होती है, पानी की बचत होती है, मिट्टी की संरचना बेहतर बनी रहती है तथा खरीफ के बाद रबी एवं उतेरा फसलों का बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यह पद्धति किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसी क्रम में ग्राम मगरदर्रा में भी किसानों के खेतों में सुपर सीडर मशीन के माध्यम से डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई कराई गई। इस दौरान कृषक अशोक उइके, बस्तीराम उइके, रामन चौधरी, राजेश राहंगडाले, छमन बाई ऐड़े सहित अन्य किसानों ने भी इस तकनीक को अपनाते हुए अपने खेतों में धान की बुवाई की।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि डीएसआर तकनीक जल संरक्षण, कम लागत, श्रम की बचत तथा टिकाऊ कृषि की दिशा में एक प्रभावी विकल्प है। जिले में इस तकनीक के प्रति किसानों का बढ़ता रुझान भविष्य में कृषि को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
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Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 27, 2026