पटेढ़ी बेलसर: बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती विजयोत्सव दिवस के रुप में चकुलामुद्दीन में मनाई गई।
भारत देश की आजादी को लेकर मेरठ में सन् 1857 में सिपाही विद्रोह के रुप में जो चिनगारी फुटी उसकी लपट बिहार भी पहुंची और उसमें अस्सी साल का बुढ़ा शेर भी खुद को रोक न सका l अपने खराब स्वास्थ्य के बाबजुद लगभग एक साल तक ब्रिटिश सेना की नींद हराम करने वाले बाबू वीर कुंवर सिंह अपने देश के युवाओं के प्रेरणाश्रोत बने और जंगे आजादी की दिशा ही बदल दी l