छः बड़े बांधों के सहारे बदली चित्रकूट विधानसभा की तस्वीर
कभी पानी के लिए तरसता था क्षेत्र, अब सिंचाई और जलस्तर सुधार की दिशा में स्थायी समाधानः सुरेन्द्र सिंह
सतना/चित्रकूट। चित्रकूट विधानसभा की राजनीति में पानी हमेशा एक बड़ा सवाल रहा है। खेतों की सिंचाई, गिरता भू-जलस्तर और वर्षा पर निर्भर खेती ग्रामीण अंचल की पुरानी चिंता रही है। इसी सवाल को विकास के एजेंडे से जोड़ते हुए चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार ने सतना सहित स्थानीय पत्रकारों को अपने विधानसभा क्षेत्र का एक दिवसीय भ्रमण कराया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में तैयार किए गए छह बड़े जलाशयों एवं बांधों को सार्वजनिक रूप से सामने रखते हुए इन्हें किसानों के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाएं बताया। गहरवार का संदेश साफ था-विकास का मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि खेतों तक पहुंचने वाले पानी से होना चाहिए।
बांधों के जरिए पानी पर बड़ा दांव
भ्रमण के दौरान विधायक ने क्रमशः आठवरही-लालपुर चकर बांध, सगर बाबा बांध-बढ़खेड़ा, फलाहारी बांध-मचखड़ा, तेलिहाई बांध-पगार खुर्द, ढोडहा बांध और हिनौता बांध का उल्लेख किया। इन परियोजनाओं पर कई करोड रुपये खर्च किए गए हैं। विधायक का दावा है कि इन जल संरचनाओं के बनने से क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ भू-
जलस्तर की समस्या के समाधान में भी मदद मिलेगी। राजनीतिक तौर पर देखें तो यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण राजनीति में सड़क और भवन के बाद पानी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा माना जाता है। ऐसे में किसानों के खेत तक पानी पहुंचाने वाली परियोजनाओं को सामने रखकर विधायक ने अपने विकास मॉडल का केंद्र किसान और जल संसाधन को बनाया है।
विधायक मद में शिक्षा और किसान पहली प्राथमिकता
विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार ने कहा कि उन्होंने अपने विधायक मद की राशि के उपयोग में शिक्षा और किसानों के लिए पानी की व्यवस्था को प्राथमिकता दी है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं और किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना क्षेत्र के भविष्य के लिए सबसे जरूरी निवेश है। एक तरफ शिक्षा को लेकर काम और दूसरी तरफ सिंचाई तथा जल संरक्षण पर जोर-गहरवार इसे क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास से जोड़ते दिखाई दिए।
पानी आया तो खेती की तस्वीर बदलने की उम्मीद
चित्रकूट विधानसभा का बड़ा ग्रामीण भूभाग कृषि पर निर्भर है। बारिश अच्छी हो तो खेती बेहतर, लेकिन मानसून कमजोर हुआ तो किसानों की चिंता बढ़ जाती है। ऐसे में जलाशयों के निर्माण से वर्षा जल को रोकने और उसका उपयोग सिंचाई में करने की संभावनाएं बढ़ती हैं। ग्रामीणों के लिए बांध सिर्फ पानी रोकने की संरचना नहीं, बल्कि फसल, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा की उम्मीद हैं। यही कारण रहा कि निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
पत्रकारों के सामने विकास का जमीनी रिपोर्ट कार्ड
विधायक द्वारा पत्रकारों को साथ लेकर क्षेत्र भ्रमण कराने को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। आमतौर पर विकास कार्यों का की जानकारी सरकारी कागजों या मंचों से सामने की आती है, लेकिन इस भ्रमण में पत्रकारों को सीधे मौके पर ले जाकर जल परियोजनाओं स्थिति दिखाने का प्रयास किया गया। इस दौरान स्थानीय नागरिकों से संवाद भी हुआ। लोगों ने क्षेत्र में हुए कार्यों को लेकर अपनी बातें रखीं। कई स्थानों पर विधायक और पत्रकारों का ग्रामीणों ने आत्मीय स्वागत किया।
देहाती स्वाद ने भी जीता दिल
विकास की चर्चा के साथ ग्रामीण अंचल की मेहमाननवाजी भी पूरे भ्रमण में आकर्षण का केंद्र रही। जगह-जगह विधायक और पत्रकारों का आत्मीय स्वागत किया गया। स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक देहाती भोजन से अतिथियों की अगवानी की। स्थानीय स्वाद और ग्रामीणों की आत्मीयता भ्रमण के दौरान चर्चा का विषय बनी रही।
अब असली परीक्षा रखरखाव और खेत तक पानी पहुंचाने की
हालांकि जलाशयों के निर्माण के बाद सबसे बड़ी चुनौती उनका स्थायी रखरखाव, जल प्रबंधन और वास्तविक सिंचाई लाभ सुनिश्चित करना होगी। बांध बनने के बाद पानी कितने खेतों तक पहुंचेगा, कितने किसानों को नियमित सिंचाई मिलेगी और भू-जलस्तर में कितना सुधार आएगा-इन सवालों का वास्तविक जवाब आने वाले वर्षों में जमीन पर दिखाई देगा। फिलहाल विधायक गहरवार ने छह बड़े जलाशयों को सामने रखकर चित्रकूट की राजनीति में 'पानी और किसान' को अपने विकास एजेंडे का प्रमुख आधार बनाने का स्पष्ट संकेत दिया है।
Raghurajnagar Nagareey, Satna | Sep 14, 2026