प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने में हरियाणा प्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।
विधायक जगमोहन आनंद ने कहा कि जब सम्मानजनक जीवन की बुनियादी जरूरतों को सुनिश्चित किया गया, तब अगला महत्वपूर्ण प्रश्न स्वास्थ्य से संबंधित था। लंबे समय तक भारत में किसी गंभीर बीमारी का मतलब अक्सर परिवार की जमा-पूंजी खत्म हो जाना या फिर इलाज से समझौता करना होता था। इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया गया। पिछले बारह वर्षों में ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित की गई, जो लोगों तक उनकी जरूरत के समय पहुँचती है, गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराती है और इलाज के खर्च के कारण परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ने देती। दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना सहित कई पहलों ने स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और व्यापक बनाया है।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत देश भर में 44.09 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए जिसमें 12.03 करोड़ अस्पताल भर्ती कवर शामिल हैं। सार्वजनिक बीमा के तहत 1,80,435 करोड़ रुपये का इलाज किया गया। हर दिन 40,000 से अधिक दावे निपटाए गए। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत 36,000 से अधिक सार्वजनिक और निजी अस्पताल सूचीबद्ध हैं और समाज के 40 प्रतिशत सबसे जरूरतमंद (गरीब) परिवारों के लिए 5 लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष का स्वास्थ्य बीमा किया जाता है। इसी तरह आयुष्मान भारत वय वंदना योजना के तहत 1.20 करोड़ वरिष्ठ नागरिक नामांकित हैं जिसमें 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को 3,000 करोड़ रुपये के 13.84 लाख से अधिक उपचार मिले।
देश के विकास से नेतृत्व तक, महिलाओं की बढ़ी भूमिका: विधायक जगमोहन आनंद
विधायक जगमोहन आनंद ने कहा कि एक सशक्त भारत का निर्माण तभी संभव है जब उसकी महिलाएं स्वस्थ, शिक्षित, सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरपूर हों। इस सरकार की सोच केवल महिलाओं के कल्याण तक सीमित नहीं रही। प्रयास यह रहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए अवसर, संसाधन और अधिकार सीधे उपलब्ध कराए जाएँ। उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, सुरक्षा सुनिश्चित हो और निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़े। पूंजी, शिक्षा, सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को उनके हाथों तक पहुँचाने की इसी सोच का परिणाम नीचे दिए गए आंकड़ों में दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि इस सरकार का बदलाव महिलाओं को कल्याण की प्राप्तकर्ता मानने से हटकर उन्हें राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाने का है। यह नारा नहीं, नीति है। उन्होंने बताया कि देश में 2014-15 में लिंगानुपात 918 से बढक़र 2024-25 में 929 प्रति 1,000 लडक़े हो गया। समग्र अनुपात 943 से बढक़र 1,020 महिला प्रति 1,000 पुरुष हुआ। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ ने सिर्फ बेटियों को नहीं बचाया, भारत की सोच बदली। वहीं लखपति दीदी योजना के तहत 3.07 करोड़ महिलाएँ अब अपने उद्यम से सालाना एक लाख रुपये से अधिक कमाती हैं। मार्च 2029 तक 6 करोड़ लखपति दीदी का लक्ष्य रखा गया है।
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