एक ऐसा गांव जहां रावण की होती है पूजा, दशहरे में नहीं जलाया जाता,दूसरी ओर रावण दहन जगह जगह
अभी तक आपने दशहरे के दिन रावण दहन तो हर जगह देखा होगा, लेकिन आज हम आपको चित्रकूट के ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां रावण का दहन नहीं होता है. बल्कि इस गांव के लोग रावण की पूजा करते हैं. उनका मानना है कि यह परंपरा हमारे लगभग 200 साल से भी ज्यादा पुरानी है, और हमारे गांव में रावण का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है.
आपको बता दे की चित्रकूट जिले के रैपुरा गांव में रावण को दहन न करने वाली अनोखी परंपरा निभाई जाती है. गांव के बीचो बीच रावण की एक विशाल प्रतिमा बनाई गई है. जिसकी हर साल दशहरे के साथ साथ कई अन्य पर्व में पूजा की जाती है. गांव वालों का मानना है कि रावण के आशीर्वाद से हमारे गांव में कई आईएएस आईपीएस और पीसीएस सहित कई अधिकारी हुए हैं. और हमारे यहां दशहरे के दिन तक रामलीला का आयोजन होता है जिसमें हम लोग रावण का दहन नहीं बल्कि रावण का वध करते हैं.
वही गांव के प्रधान जगदीश पटेल गुड्डा ने बताया कि यह परंपरा लगभग 250 साल पुरानी है. यहां दशहरे के दिन रावण को जलाया नहीं उसका वध होता है.लंकापति रावण चारों वेदों, छह शास्त्रों का ज्ञाता था. हम व्यक्तिगत रूप से खुद अपने शुभ कार्यों में सबसे पहले रावण की ही पूजा करते हैं उसके बाद ही कोई शुभ कार्य करने के लिए जाते हैं. उनका मानना है कि उन्हें का आशीर्वाद आज हमारे गांव में आईएएस पीसीएस और सरकारी नौकरियों को लगवा रहा है।
बाइट - जगदीश पटेल गुड्डा प्रधान
बाइट - ग्रामीण रैपुरा निवासी
Karwi, Chitrakoot | Oct 20, 2026