सुमन कल्याणपुर (जन्म नाम: सुमन हेममाडी) भारतीय सिनेमा की एक बेहद प्रतिष्ठित और लोकप्रिय पार्श्व गायिका (प्लेबैक सिंगर) थीं। उन्होंने अपनी जादुई और सुरीली आवाज से 1960 और 1970 के दशक में भारतीय संगीत उद्योग पर गहरा प्रभाव छोड़ा। अपनी बेहतरीन गायकी के कारण उन्हें साल 2023 में भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 89 वर्ष की आयु में 31 मई 2026 को मुंबई में उनका निधन हो गया।
संगीत सफर और लता मंगेशकर से तुलना
सुमन कल्याणपुर की आवाज और गाने का अंदाज स्वर कोकिला लता मंगेशकर से काफी मिलता-जुलता था। इस समानता के कारण शुरुआती दिनों में रेडियो सीलोन और म्यूजिक रिकॉर्ड्स पर अक्सर उनके गानों को गलती से लता जी का गाना समझ लिया जाता था। जब 1960 के दशक में रॉयल्टी विवाद के कारण लता मंगेशकर ने महान गायक मोहम्मद रफी के साथ गाने से इनकार कर दिया था, तब सुमन कल्याणपुर संगीतकारों की पहली पसंद बनीं। इस सुनहरे दौर में उन्होंने मोहम्मद रफी के साथ 140 से अधिक सदाबहार युगल गीत (डुएट्स) गाए।
यादगार और लोकप्रिय गाने
सुमन कल्याणपुर ने हिंदी के अलावा मराठी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, असमिया, भोजपुरी और पंजाबी सहित कई भाषाओं में 3,000 से अधिक फिल्मी और गैर-फिल्मी गीत रिकॉर्ड किए।
उनके कुछ सबसे लोकप्रिय हिंदी गाने
आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे (फिल्म: ब्रह्मचारी)ना ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे (फिल्म: जब जब फूल खिले)तुमने पुकारा और हम चले आए (फिल्म: राजकुमार)न तुम हमें जानो, न हम तुम्हें जानें (फिल्म: बात एक रात की)दिल एक मंदिर है (फिल्म: दिल एक मंदिर)जूही की कली मेरी लाडली (फिल्म: दिल एक मंदिर)गिर गई रे मोरे माथे की बिंदिया (फिल्म: पाकीज़ा रंग-बरंग)