🚨 मझौली में कॉलेज के पास तेज रफ्तार ऑटो पलटा, चालक गंभीर रूप से घायल! आखिर बेलगाम ऑटो चालकों पर कब कसेगा शिकंजा?
ओवरलोड सवारी, तेज रफ्तार, रॉन्ग साइड और यातायात नियमों की अनदेखी से बढ़ रहा हादसों का खतरा; क्या किसी बड़े हादसे के इंतजार में बैठा है परिवहन विभाग?
प्राइड कदम समाचार | जिला ब्यूरो प्रमुख सीधी : विनय कुमार त्रिपाठी
सीधी/मझौली। सीधी जिले में ऑटो चालकों की मनमानी और यातायात नियमों की अनदेखी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मझौली थाना अंतर्गत कॉलेज के पास तेज रफ्तार से जा रहा एक ऑटो पलट गया। बताया जा रहा है कि ऑटो मझौली से महान की ओर जा रहा था। हादसे में चालक बुरी तरह घायल हो गया। घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और ऑटो संचालन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, हादसे के कारणों और चालक की चोटों की गंभीरता की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
⚫ जिले में बेलगाम ऑटो संचालन पर कब लगेगी लगाम?
सीधी जिले की सड़कों पर ऑटो संचालन को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने के आरोप हैं, तो कहीं तेज रफ्तार और रॉन्ग साइड वाहन चलाने की शिकायतें। बीच सड़क पर ऑटो रोककर सवारियां बैठाना, यातायात व्यवस्था बाधित करना और यात्रियों के साथ कथित बदसलूकी जैसी समस्याएं भी चिंता का विषय हैं।
सबसे गंभीर सवाल नशे की हालत में वाहन चलाने की आशंका को लेकर है। यदि चालक नशे में वाहन चलाते हैं, तो यह केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि यात्रियों और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। ऐसे मामलों में जांच और नियमानुसार सख्त कार्रवाई आवश्यक है।
🔴 यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे क्यों?
ऑटो में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वाहन चालक की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद यदि क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जाती हैं, निर्धारित गति सीमा की अनदेखी होती है और वाहन मनमाने तरीके से चलाए जाते हैं, तो दुर्घटना का खतरा बढ़ना स्वाभाविक है।
सवाल यह है कि क्या ऑटो चालकों की मनमानी पर प्रभावी निगरानी हो रही है? क्या परिवहन विभाग और यातायात पुलिस नियमित जांच कर रहे हैं? क्या ओवरलोडिंग, तेज रफ्तार, रॉन्ग साइड और नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है?
हादसे के बाद जागेगा प्रशासन या पहले होगी कार्रवाई?
मझौली में कॉलेज के पास ऑटो पलटने की घटना को चेतावनी के रूप में लिया जाना चाहिए। प्रशासन को क्षेत्र में संचालित ऑटो की जांच, चालकों के दस्तावेजों का सत्यापन, वाहन की फिटनेस, बीमा, परमिट और निर्धारित यात्री क्षमता की जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, तेज रफ्तार और नशे में वाहन चलाने की शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।
जनता का सवाल साफ है—सड़क पर चलने वाले यात्रियों की जान की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
अगर नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो केवल औपचारिक कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। जरूरत है नियमित जांच, जवाबदेही और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की।
अब देखना यह है कि मझौली की इस घटना के बाद जिम्मेदार विभाग यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या फिर किसी अगली दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई की याद आएगी।