आखिर कब सुधरेंगे शहर के हाल?
लाखों रुपये का बजट नालों की साफ-सफाई के नाम पर पास होता है, लेकिन बारिश आते ही सड़कों पर जलभराव और गंदगी व्यवस्था की पोल खोल देती है।
नाले सफाई की बाट जोह रहे हैं और जनता पानी में रास्ता तलाशने को मजबूर है।
कागजों में सफाई या धरातल पर भी कुछ काम?
जिम्मेदारों से अब शहर की जनता जवाब चाहती है।