बस्तर पंडुम के विजेता दल, मांझी-चालकी, गीत-संगीत से जुड़े बस्तरिया कलाकार और राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित हस्तियां आज दिल्ली की यात्रा पर हैं। सफर सिर्फ मंजिल तक पहुंचने का नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति को साथ लेकर चलने का है।
ट्रेन के डिब्बों में जब गोंडी बोली के पारंपरिक गीत गूंजते हैं, तो पूरा माहौल बस्तरमय हो उठता है। ढोल-मांदर की थाप भले साथ न हो, लेकिन सुर और संस्कृति की मिठास हर चेहरे पर मुस्कान बिखेर रही है।
दिल्ली की राह में ये कलाकार अपने गीतों के माध्यम से बस्तर की परंपरा, लोकजीवन और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर रहे हैं। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने और उन्हें देश की राजधानी तक पहुंचाने का एक सुंदर प्रयास है।
बस्तर की पहचान उसकी संस्कृति है, और आज वही संस्कृति हंसफर ट्रेन में गीतों के रूप में पूरे उत्साह के साथ सफर कर रही है।
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1 views | Kanker, Chhattisgarh | Jul 29, 2026