बिजली कंपनियों के निजीकरण और पैरेलल लाइसेंस के खिलाफ गरजे कर्मचारी व किसान, प्रदशर्रून कर सरकार को दी सीधी चेतावनी
निजी कंपनियों को पैरेलल लाइसेंस देने से सरकारी बिजली कंपनियां पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी : नारायण प्रकाश
बिजली विभाग के निजीकरण से सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्र को होगा : किसान
भिवानी, 19 अक्तूबर : सरकार द्वारा बिजली क्षेत्र में 11 निजी पावर कंपनियों को पैरेलल लाइसेंस दिए जाने और एग्रो डिस्कॉम के गठन के प्रस्ताव के खिलाफ बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का गुस्सा फूट पड़ा है। भिवानी जिले के ढिग़ावा जाटान में मंगलवार को बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, किसानों और ग्रामीण सरपंचों ने एकजुट होकर हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।
इस विरोध प्रदर्शन में बिजली संयुक्त संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की और आंदोलन को आर-पार की लड़ाई बनाने का ऐलान किया। इस मौके पर हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता इंजीनियर नारायण प्रकाश ने कहा कि सरकार बिजली विभाग का निजीकरण करके इसे चंद कॉरपोरेट घरानों के हाथों में सौंपना चाहती है। निजी कंपनियों को पैरेलल लाइसेंस देने से सरकारी बिजली कंपनियां पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी और आम जनता पर महंगे बिजली बिलों का भारी बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सरकार एग्रो डिस्कॉम और पैरेलल लाइसेंसिंग की आड़ में सार्वजनिक क्षेत्र के बिजली ढांचे को खत्म करने पर तुली है। वे सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हैं कि वह बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने की इन किसान व जनविरोधी नीतियों से तुरंत दूर रहे। यदि सरकार ने अपनी मनमानी बंद नहीं की, तो कर्मचारी, किसान और आम जनता सडक़ से लेकर संसद तक आंदोलन करने को मजबूर होगी। आगामी हड़ताल सहित संघर्ष मोर्चा के हर एक विरोध कार्यक्रम को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने की शपथ आज हम सबने मिलकर ली है।
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि कर्मचारियों के इस आंदोलन को क्षेत्र के किसानों और ग्राम पंचायतों का भी पूरा समर्थन मिला। मौके पर मौजूद किसान नेताओं मेवा सिंह,, सतबीर सिंह ने कहा कि बिजली विभाग के निजीकरण से सबसे ज्यादा नुकसान ग्रामीण इलाकों और कृषि क्षेत्र को होगा। निजी कंपनियां सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए काम करेंगी, जिससे किसानों को मिलने वाली सब्सिडी और निर्बाध बिजली आपूर्ति पर संकट खड़ा हो जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने पैरेलल लाइसेंस देने और एग्रो डिस्कॉम से जुड़े फैसले को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में जिलेभर में बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।