गया में पंचायत विकास की नई पहल, डीएम ने सभी मुखियाओं को दिया बड़ा टास्क; तीन दिन में मांगी विकास योजनाओं और समस्याओं की रिपोर्ट
गया: जिले में पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को तेज गति देने और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने सोमवार को जिले के सभी मुखियाओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'पंचायत विकास संवाद कार्यक्रम' आयोजित किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी प्रखंडों के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) समेत विभिन्न विभागों के पदाधिकारी भी शामिल हुए।
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने कहा कि पंचायतों के समग्र विकास के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने सभी मुखियाओं को निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी पंचायत में सर्वोच्च प्राथमिकता वाली एक-एक जनकल्याणकारी योजना का चयन करें और उसका समेकित प्रतिवेदन तैयार कर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के क्षेत्र भ्रमण के दौरान इन्हीं चयनित योजनाओं का स्थलीय अनुश्रवण किया जाएगा, ताकि योजनाओं की प्रगति का वास्तविक आकलन किया जा सके और जरूरत पड़ने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई हो।
डीएम ने मुखियाओं से यह भी कहा कि वे अपनी पंचायतों की प्रमुख समस्याओं को सूचीबद्ध कर संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी को उपलब्ध कराएं। इन समस्याओं में सड़क, पेयजल, नाली, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, सिंचाई, आवास, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं सहित अन्य स्थानीय मुद्दों को शामिल करने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान कराया जा सके।
जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मुखियाओं से प्राप्त सभी योजनाओं एवं प्रस्तावों को समेकित कर तीन दिनों के भीतर जिला पंचायत राज कार्यालय, गया को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट मिलने के बाद जिला स्तर पर समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान डीएम ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भी निर्देशित किया कि वे अपने-अपने विभाग से संबंधित लंबित समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिले, इसके लिए सभी विभागों को समन्वय स्थापित कर कार्य करना होगा। विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
पंचायत विकास संवाद कार्यक्रम के माध्यम से जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि अब विकास योजनाओं की निगरानी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर उनकी गुणवत्ता और प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा। प्रशासन की इस पहल से पंचायतों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप योजनाएं तैयार होंगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही भी बढ़ेगी।
जिला प्रशासन की इस नई पहल को पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान का रास्ता भी मजबूत होगा।