1947 तक जब भारतीय लोग नैनीताल में चलते थे तो हर जगह अंग्रेज़ ही दिखते थे ✅:
आज का खूबसूरत नैनीताल कभी पूरी तरह British City हुआ करता था। बहुत कम लोग जानते हैं कि 1841 में जब अंग्रेजों ने यहाँ बसना शुरू किया, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह छोटा सा पहाड़ी इलाका कुछ ही दशकों में British India का सबसे शानदार Hill Station बन जाएगा।
1880 तक Nainital में लगभग 10,000 अंग्रेज रह रहे थे, जिनमें करीब 5,000 English Ladies (Memsahibs) थीं। उस दौर के कई इतिहासकार लिखते हैं कि 1947 तक अगर कोई व्यक्ति Mall Road, Church, Schools, Colleges, Clubs, Shops या Government Office में घूमता था, तो उसे हर तरफ अंग्रेज ही दिखाई देते थे। भारतीय और स्थानीय लोग बहुत कम संख्या में थे। उस समय ऐसा माहौल था कि मानो आप भारत में नहीं, बल्कि सीधे England की किसी सड़क पर घूम रहे हों।
सोचिए... आज जिस Mall Road पर लाखों भारतीय पर्यटक घूमते हैं, कभी वहाँ अंग्रेज अफसर, उनकी Memsahibs, बच्चे और सैनिक ही सबसे ज़्यादा नज़र आते थे। नैनीताल की पहचान ही एक English Town के रूप में थी।
Nainital History 1841✅:
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती क्योकि जब नैनीताल के बारे में स्थानीय लोगों के अलावा लगभग कोई नहीं जानता था, तब अंग्रेजों ने ही इसकी खूबसूरती की चर्चा पूरी दुनिया में फैला दी। British India से लेकर England, Scotland, Poland और यहाँ तक कि USA तक नैनीताल का नाम पहुँच चुका था।
इसी प्रसिद्धि का असर था कि 1858 में USA से आए एक American Missionary ने यहाँ ईसाई धर्म के प्रचार का कार्य शुरू किया। उसी दौर में Methodist Church (1858) और CRST School जैसी संस्थाएँ स्थापित हुईं, जो आज भी उस ऐतिहासिक विरासत की गवाही देती हैं।
यानी आज का नैनीताल सिर्फ झीलों और पहाड़ों की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा शहर है जिसने कभी पूरी दुनिया, खासकर British Empire, का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। और यही इतिहास नैनीताल को भारत के सबसे अनोखे शहरों में से एक बनाता है।
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