मनीष निरेटी: बस्तर के उस युवक की कहानी, जिसने नक्सलियों के लाल गढ़ में तिरंगा फहराने का सपना देखा 🇮🇳
बस्तर के जंगलों में आज़ादी का मतलब सिर्फ़ 15 अगस्त मनाना नहीं, बल्कि डर के माहौल में भी अपने देश के लिए खड़े होने का साहस है।
15 अगस्त 2025 को बिना गुंडा गांव के युवक मनीष निरेटी ने नक्सलियों के प्रभाव वाले इलाके में तिरंगा फहराने का साहस किया। उसके लिए यह सिर्फ़ झंडा फहराना नहीं था—यह माओवाद के खिलाफ़ आज़ादी और बस्तर के भविष्य में विश्वास का संदेश था।
नक्सलियों ने इसे चुनौती माना और जन अदालत लगाकर मनीष को मौत की सजा दे दी।
आज, एक साल बाद, सवाल और भी बड़ा है—
क्या मनीष का सपना बस्तर में आकार ले रहा है?
क्या गांव में डर की जगह विकास और तिरंगे की पहचान मजबूत हुई है?
यह कहानी सिर्फ़ एक शहादत को याद करने की नहीं, बल्कि यह देखने की भी है कि **एक साल बाद उस गांव में क्या बदला।
🇮🇳 मनीष निरेटी की कहानी—बस्तर के बदलते दौर की एक ज़मीनी कहानी।
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Raipur, Raipur | Aug 21, 2026