गीता ज्ञान संस्थानम् में ‘जानो गीता, मानो गीता’ एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
कुरुक्षेत्र, 7 सितम्बर। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज के सान्निध्य में गीता ज्ञान संस्थानम् के सभागार में एक दिवसीय 'जानो गीता, मानो गीता कार्यशाला का आयोजन किया गया। जीओ गीता के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला का मूल उद्देश्य श्रीमद्भगवद्गीता के सनातन एवं जीवनोपयोगी संदेश को जन-जन तक पहुंचाना तथा उसके आध्यात्मिक, नैतिक एवं व्यावहारिक पक्ष को जीवन से जोड़ना रहा।
इस कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में गीता की पृष्ठभूमि, गीता का परिचय एवं प्रासंगिकता, कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग तथा समता, समरसता एवं सद्भावना जैसे विषयों पर विद्वान वक्ताओं द्वारा सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज एवं उपस्थित विद्वान वक्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन करके किया गया। जीओ गीता के उपाध्यक्ष डॉ. मार्कण्डेय आहूजा ने गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज का स्वागत किया तथा जीओ गीता के उद्देश्यों एवं गतिविधियों से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
‘जानो गीता, मानो गीता’ एक दिवसीय कार्यशाला के प्रथम सत्र का विषय ‘गीता जी की पृष्ठभूमि’ रहा। इस सत्र में गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने ‘क्यों पढ़ें भगवद्गीता’ विषय पर अपना प्रेरणादायी मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने गीता के शाश्वत संदेश को वर्तमान जीवन की परिस्थितियों से जोड़ते हुए इसके अध्ययन एवं मनन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। गीत मनीषी ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को कर्तव्य, विवेक, आत्मसंयम, सकारात्मक चिंतन एवं लोककल्याण की दिशा प्रदान करने वाला शाश्वत जीवन-दर्शन है।
सेवानिवृत्त आईएएस एवं जीओ गीता की संस्थापक सदस्य डॉ. सुमेधा कटारिया ने महाभारत युद्ध के कारण एवं कुरुक्षेत्र का वर्णन विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वहीं श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. कृष्णकान्त गुप्ता ने ‘श्रीमद्भगवद्गीता और विश्व-समुदाय: विचार, चरित्र और जीवन-मूल्य’ विषय पर प्रकाश डाला।
जीएमएन कॉलेज अंबाला कैंट के प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने ‘युद्धभूमि में गीता – अशांति और दुविधा के वातावरण में शांति-संदेश’ विषय के माध्यम से बताया कि विषम एवं तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी गीता मनुष्य को धैर्य, विवेक और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। सत्र के अंत में स्वामी ज्ञानानन्द महाराज ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए गीता के संदेश को आत्मसात करने का आह्वान किया।
द्वितीय सत्र में ‘भगवद्गीता परिचय एवं प्रासंगिकता’ विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। इसमें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. तजिंदर शर्मा ने ‘नामकरण, अध्याय परिचय एवं गीता महिमा’ विषय पर गीता के स्वरूप, संरचना एवं महत्त्व को स्पष्ट किया। सेवानिवृत्त आईएएस एवं जीओ गीता उत्तर प्रदेश के संयोजक मणि प्रसाद मिश्र ने ‘उवाच पात्र परिचय एवं प्रेरणा’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर डॉ. विवेक कोहली ने ‘गीता के प्रेरणा सूत्र’ के माध्यम से गीता के प्रमुख जीवन-संदेशों को सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया।
तृतीय सत्र में गीता के तीन योग विषय पर चर्चा हुई। इसमें कर्मयोग – ‘स्वार्थी नहीं, परमार्थी’, भक्तियोग – ‘शांत, स्थिर एवं सरल मन का सशक्त आधार’ तथा ज्ञानयोग – ‘बौद्धिक जागरूकता एवं जीवन प्रबंधन’ जैसे विषयों पर डॉ. मार्कण्डेय आहूजा ने विस्तार से प्रकाश डाला। चतुर्थ सत्र ‘गीता यात्रा’ को समर्पित रहा। इस अवसर पर चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा की डॉ. आरती गौड़ ने गीता एवं समता के संबंध पर विचार प्रस्तुत करते हुए ‘गीता यात्रा’ के माध्यम से गीता के संदेश को दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
फोटो कैप्शन :- जानो गीता, मानो गीता कार्यशाला में संबोधित करते गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज और मौजूद प्रतिभगी।
Thanesar, Kurukshetra | Sep 7, 2026