कला कीर्ति भवन में हरियाणवी संस्कृति के संग मना भव्य तीज उत्सव, लोकगीतों, नृत्यों, पारंपरिक पींघ और व्यंजनों से महकी सावन की सांझ
-------
कुरुक्षेत्र में एचपीएससी सदस्य ज्योति बैंदा ने पींघ झूलकर और पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर मनाया तीज, लोक संगीत और नृत्यों की त्रिवेणी ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
----------
कुरुक्षेत्र, 13 अगस्त 2026। तीज का त्योहार हमारी संस्कृति की जड़ों और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। तीज हमारी मिट्टी की खुशबू, प्रकृति और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। आज जब युवा पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है, तब ऐसे पारंपरिक उत्सव उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने में एक सेतु का कार्य करते हैं। ये कहना था हरियाणा लोक सेवा आयोग की सदस्या ज्योति बैंदा का। वे हरियाणा कला परिषद द्वारा कला कीर्ति भवन में आयोजित तीज उत्सव के दौरान बतौर मुख्यअतिथि दर्शकों को सम्बोंधित कर रही थी। सावन के इस पावन महीने में आयोजित हुए इस उत्सव में समूचा कला कीर्ति भवन हरियाणवी लोक संस्कृति, सतरंगी लोक परंपराओं और त्योहार के असीम उल्लास के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक लोक कलाओं से रूबरू करवाना रहा। कार्यक्रम से पूर्व मुख्य अतिथि ज्योति बैंदा ने परिसर में विशेष रूप से लगाए गए पारंपरिक पींघ का आनंद लिया। इसके साथ ही उन्होंने सावन के विशेष पारंपरिक हरियाणवी व्यंजनों गरमा-गरम गुलगुले और खस्ता सुहाली का स्वाद चखकर उत्सव की सराहना की और इस सुंदर व्यवस्था के लिए हरियाणा कला परिषद को बधाई दी। भरतमुनि रंगशाला के बाहर जहां एक ओर पारंपरिक परिधान में महिलाएं सावन और तीज के गीतों से अतिथियों का स्वागत करती नजर आई, बीन वादन नवीन नाथ के दल ने लोगों को बीन की स्वर लहरियों पर झूमने पर मजबूर कर दिया। इस अवसर पर हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने मुख्य अतिथि को पौधा भेंट कर स्वागत किया तथा तीज उत्सव में पधारे सभी कलाकारों और कलाप्रेमियों का सहृदय अभिनंदन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा की लोक संस्कृति बहुत समृद्ध और गौरवशाली है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कुशल मार्गदर्शन में हरियाणा कला परिषद निरंतर हमारी प्राचीन कलाओं और परंपराओं को सहेजने के लिए प्रतिबद्ध है। सांस्कृतिक संध्या का भव्य आगाज़ हरियाणा राज्य गीत से किया गया। इसके बाद नवीन नाथ और उनके दल द्वारा बीन की सुरीली और थिरकने पर मजबूर कर देने वाली धुनों ने कला कीर्ति भवन के पूरे प्रांगण में एक ऐसी अनूठी ऊर्जा का संचार किया कि उपस्थित दर्शक दीर्घा तालियां बजाने से खुद को रोक नहीं पाई। बीन वादन की इस बेहतरीन प्रस्तुति ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
बीजणा और टोकणी नृत्य ने बांधा समां, दर्शकों ने की सराहना
---------
इसके पश्चात सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए रोहतक से पधारीं विख्यात नृत्यांगना लीला सैनी और उनके दल एल के एम फाउंडेशन ने मंच पर कदम रखा। दल के कलाकारों ने एक के बाद एक कई बेहतरीन हरियाणवी लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिला कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में लाख टके का बीजणा, पाणी ल्यावण जा रही ए मेरी सस रानी सब सखियों के संग तथा तोड़ो तोड़ो री ननदी मेहंदी के पात जैसे हरियाणवी लोकगीतों पर अत्यंत मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। हाथों में रंग-बिरंगे बीजणा लेकर और सिर पर चमचमाती टोकणी रखकर किए गए सधे हुए नृत्यों ने हरियाणवी नारी के पारंपरिक सौंदर्य और उल्लास को मंच पर जीवंत कर दिया। लोकनृत्यों की इस धमाकेदार प्रस्तुति के बाद भिवानी से आए सुभाष पपोसा और उनके दल ने अपनी मखमली और बुलंद आवाज से पारंपरिक लोकगीतों की महफिल सजाई। उनके दल ने सावन के मल्हार और पारंपरिक गीतों की ऐसी तान छेड़ी कि पूरा वातावरण संगीतमय हो गया। दल द्वारा गाए गए विशेष लोकगीत रात ना सोई रे किरसन तेरे चाव की मारी, सावन मां झूल घली कामण की और तोड़े पत्ते पिपलां के पर दर्शकों के साथ-साथ मुख्यअतिथि ज्योति बैंदा, महेश जोशी और अन्य महिला दर्शक भी मंच पर जाकर झूमने पर मजबूर हो गए। कार्यक्रम के अंत में हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने मुख्य अतिथि ज्योति बैंदा को तीज का प्रतीक पारम्परिक हरी चुनरी और स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार जताया। वहीं सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। तीज उत्सव का लुत्फ उठाने के लिए पूर्व जिला संपर्क अधिकारी देवराज सिरोहीवाल, भाजपा नेत्री भारती धिमान, प्रेरणा संस्थान से आशा सिंगला, किरण गर्ग, सुरेखा, हरिकेश पपोसा, शिवकुमार किरमच आदि भारी संख्या में गणमान्य नागरिक, महिलाएं, बच्चे और कलाप्रेमी उपस्थित रहे।