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मंच भी बदला, तस्वीर भी हटी: महिला कांग्रेस में ममता रानी की अनुपस्थिति बनी चर्चा का विषय Udham Singh Nagar Police Uttarakhand The Times of uttarakhand Uttarakhand Police

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वैज्ञानिक तरीके से गन्ने की खेती कर दोगुना मुनाफा कमाएं किसान: डॉ. जीना
​किच्छा के ग्राम बरा में आयोजित हुई 'कृषक गोष्ठी', वैज्ञानिकों ने खेतों में जाकर जाँचे गन्ने के रोग, दिए अचूक उपाय
​किच्छा (उधम सिंह नगर)।
गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केन्द्र, काशीपुर के तत्वाधान में मंगलवार को गन्ना विकास परिषद, किच्छा के ग्राम बरा में एक दिवसीय ग्राम स्तरीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य गन्ना किसानों को पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने और फसल को कीट-रोगों से बचाने की जमीनी जानकारी देना था।
​प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन करते हुए काशीपुर संस्थान के श्री कपिल गुप्ता ने किसानों को पारंपरिक बुवाई पद्धति बदलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विधि से गन्ना बुवाई करने और साथ में सहफसल (Intercropping) उगाने से किसान कम लागत में अतिरिक्त लाभ अर्जित कर सकते हैं।
​इन उन्नत किस्मों के चयन से बढ़ेगा मुनाफा
​गोष्ठी के मुख्य वक्ता और पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रख्यात गन्ना वैज्ञानिक डॉ. ए.एस. जीना ने किसानों को नई और बंपर पैदावार देने वाली किस्मों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही किस्म का चुनाव ही मुनाफे की पहली सीढ़ी है। डॉ. जीना ने नवीनतम उन्नतशील गन्ना प्रजातियों जैसे— को0 13035, को0 17018, को0शा0 18231, को0शा0 17231, को0लख0 15207, को0लख0 15206, को0एच0 17261, को0पी0बी0 17215 और को0पंत 12226 की विशेषताओं के बारे में विस्तार से समझाया।
​'लाल सड़न' और 'टॉप बोरर' से ऐसे बचाएं फसल
​गन्ना शोध केन्द्र काशीपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा० संजय कुमार ने सामान्य गन्ना फसल प्रबन्धन के गुर सिखाए। उन्होंने फसल को बर्बाद करने वाले मुख्य कीटों जैसे दीमक, टॉप बोरर, कुरमुला तथा घातक रोगों जैसे लाल सड़न (रैड रॉट), स्मट और पोखा बोइंग की पहचान व उनकी रोकथाम के वैज्ञानिक उपाय बताए।
​वैज्ञानिकों ने खेतों में जाकर किया स्थलीय निरीक्षण
​गोष्ठी के ठीक बाद गन्ना वैज्ञानिक डॉ. ए.एस. जीना, डा० संजय कुमार और विभागीय अधिकारियों की टीम सीधे किसानों के खेतों में उतरी। विशेषज्ञों ने मौके पर ही खड़ी फसल में लगे 'पोक्का बोइंग' और 'काला चिटका' जैसे रोगों की लाइव पहचान की और उनके लक्षणों व सटीक उपचार के बारे में किसानों को खेत पर ही समझाया।
​विभागीय योजनाओं का उठाएं लाभ: शुभांगी कनवाल
किच्छा की गन्ना विकास निरीक्षक कु० शुभांगी कनवाल ने विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और मिलने वाले अनुदान (Subsidy) की जानकारी दी। उन्होंने कृषकों से अपील की कि वे गन्ना बुवाई में केवल स्वीकृत शुद्ध व शोधित बीज का ही प्रयोग करें।
​गोष्ठी में यह रहे मौजूद:
​इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील किसान डॉ० रतनलाल, महेश पाल, दामोदर प्रसाद, हरीश कुमार, डालचन्द्र, धर्मपाल और होरीलाल सहित बड़ी संख्या में अन्नदाता मौजूद रहे। इसके अलावा विभाग की ओर से गन्ना पर्यवेक्षक गंगा दत्त, रविशंकर काण्डपाल, हिमांशु सिंह बोरा, अरविन्द कुमार, दिनेश चन्द्र, सचिन कुमार, मो० हसनैन, मो० यूनुस, मदनलाल कालरा, सुधीर आहूजा और देवेन्द्र सिंह बिष्ट आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाई।
​— महेश प्रसाद, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, किच्छा (ऊधम सिंह नगर)।

वैज्ञानिक तरीके से गन्ने की खेती कर दोगुना मुनाफा कमाएं किसान: डॉ. जीना ​किच्छा के ग्राम बरा में आयोजित हुई 'कृषक गोष्ठी', वैज्ञानिकों ने खेतों में जाकर जाँचे गन्ने के रोग, दिए अचूक उपाय ​किच्छा (उधम सिंह नगर)। गन्ना किसान संस्थान एवं प्रशिक्षण केन्द्र, काशीपुर के तत्वाधान में मंगलवार को गन्ना विकास परिषद, किच्छा के ग्राम बरा में एक दिवसीय ग्राम स्तरीय कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य गन्ना किसानों को पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक, वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने और फसल को कीट-रोगों से बचाने की जमीनी जानकारी देना था। ​प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन करते हुए काशीपुर संस्थान के श्री कपिल गुप्ता ने किसानों को पारंपरिक बुवाई पद्धति बदलने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विधि से गन्ना बुवाई करने और साथ में सहफसल (Intercropping) उगाने से किसान कम लागत में अतिरिक्त लाभ अर्जित कर सकते हैं। ​इन उन्नत किस्मों के चयन से बढ़ेगा मुनाफा ​गोष्ठी के मुख्य वक्ता और पंतनगर विश्वविद्यालय के प्रख्यात गन्ना वैज्ञानिक डॉ. ए.एस. जीना ने किसानों को नई और बंपर पैदावार देने वाली किस्मों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही किस्म का चुनाव ही मुनाफे की पहली सीढ़ी है। डॉ. जीना ने नवीनतम उन्नतशील गन्ना प्रजातियों जैसे— को0 13035, को0 17018, को0शा0 18231, को0शा0 17231, को0लख0 15207, को0लख0 15206, को0एच0 17261, को0पी0बी0 17215 और को0पंत 12226 की विशेषताओं के बारे में विस्तार से समझाया। ​'लाल सड़न' और 'टॉप बोरर' से ऐसे बचाएं फसल ​गन्ना शोध केन्द्र काशीपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा० संजय कुमार ने सामान्य गन्ना फसल प्रबन्धन के गुर सिखाए। उन्होंने फसल को बर्बाद करने वाले मुख्य कीटों जैसे दीमक, टॉप बोरर, कुरमुला तथा घातक रोगों जैसे लाल सड़न (रैड रॉट), स्मट और पोखा बोइंग की पहचान व उनकी रोकथाम के वैज्ञानिक उपाय बताए। ​वैज्ञानिकों ने खेतों में जाकर किया स्थलीय निरीक्षण ​गोष्ठी के ठीक बाद गन्ना वैज्ञानिक डॉ. ए.एस. जीना, डा० संजय कुमार और विभागीय अधिकारियों की टीम सीधे किसानों के खेतों में उतरी। विशेषज्ञों ने मौके पर ही खड़ी फसल में लगे 'पोक्का बोइंग' और 'काला चिटका' जैसे रोगों की लाइव पहचान की और उनके लक्षणों व सटीक उपचार के बारे में किसानों को खेत पर ही समझाया। ​विभागीय योजनाओं का उठाएं लाभ: शुभांगी कनवाल किच्छा की गन्ना विकास निरीक्षक कु० शुभांगी कनवाल ने विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और मिलने वाले अनुदान (Subsidy) की जानकारी दी। उन्होंने कृषकों से अपील की कि वे गन्ना बुवाई में केवल स्वीकृत शुद्ध व शोधित बीज का ही प्रयोग करें। ​गोष्ठी में यह रहे मौजूद: ​इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रगतिशील किसान डॉ० रतनलाल, महेश पाल, दामोदर प्रसाद, हरीश कुमार, डालचन्द्र, धर्मपाल और होरीलाल सहित बड़ी संख्या में अन्नदाता मौजूद रहे। इसके अलावा विभाग की ओर से गन्ना पर्यवेक्षक गंगा दत्त, रविशंकर काण्डपाल, हिमांशु सिंह बोरा, अरविन्द कुमार, दिनेश चन्द्र, सचिन कुमार, मो० हसनैन, मो० यूनुस, मदनलाल कालरा, सुधीर आहूजा और देवेन्द्र सिंह बिष्ट आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य भूमिका निभाई। ​— महेश प्रसाद, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक, किच्छा (ऊधम सिंह नगर)।

Kichha, Udham Singh Nagar | Jun 2, 2026