➡️सफलता की कहानी...
🩺 दस्तक अभियान ने घर-घर पहुंचकर बचाई उम्मीद
दस्तक अभियान के तहत स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे गृह भ्रमण के दौरान ग्राम जेरा खास के रौतयाना मोहल्ला निवासी गजरा पत्नी गोकुल सौर की पहचान हुई। करीब 8 माह की गर्भवती गजरा की यह सातवीं गर्भावस्था है। पूर्व की गर्भावस्थाओं में शिशु को खोने के कारण परिवार बेहद चिंतित था।
गृह भ्रमण के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने महिला की स्थिति की जानकारी लेकर जांच एवं उपचार के लिए स्वास्थ्य तंत्र से जोड़ा। जांच में महिला का हीमोग्लोबिन मात्र 4.9 ग्राम/डीएल पाया गया तथा सिफलिस रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। गंभीर एनीमिया को देखते हुए तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप आवश्यक था।
जानकारी मिलते ही जेरा खास उप स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम श्रीमती विमलेश यादव ने महिला से संपर्क कर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पृथ्वीपुर बुलाया। चिकित्सकीय परामर्श के बाद महिला को FCM के दो डोज दिए गए। सोनोग्राफी में गर्भस्थ शिशु की स्थिति सामान्य पाई गई।
महिला की स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार एवं विशेषज्ञ निगरानी के लिए 108 एंबुलेंस से जिला चिकित्सालय टीकमगढ़ रेफर किया गया। आशा कार्यकर्ता श्रीमती शगुन नायक महिला के साथ जिला चिकित्सालय पहुंचीं।
गंभीर एनीमिया को देखते हुए विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक श्री अमित श्रीवास्तव द्वारा ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. विकास जैन से समन्वय कर महिला के लिए A+ रक्त की व्यवस्था कराई गई। जिला चिकित्सालय में महिला का ब्लड ट्रांसफ्यूजन शुरू किया गया और चिकित्सकीय निगरानी में उपचार जारी है।
👩⚕️ मातृ स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन की सतर्कता
कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े द्वारा जिले में महिलाओं एवं गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य को लेकर लगातार संवेदनशीलता एवं सजगता के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, प्रसव पूर्व जांच, हाई रिस्क गर्भावस्था की निगरानी तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल रेफरल एवं उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसी दिशा में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल झामनानी के मार्गदर्शन एवं खंड चिकित्सा अधिकारी सीएचसी पृथ्वीपुर डॉ. गजेंद्र निरंजन के नेतृत्व में स्वास्थ्य अमला महिला के उपचार एवं फॉलोअप में जुटा है।
समय पर पहचान बनी उम्मीद की वजह
गजरा का यह प्रकरण बताता है कि घर-घर पहुंचकर की जाने वाली स्वास्थ्य जांच कितनी महत्वपूर्ण है। समय पर हुई पहचान के कारण महिला को जांच, उपचार, रेफरल और रक्त की सुविधा मिल सकी। पूर्व की गर्भावस्थाओं के दुखद अनुभवों से निराश परिवार में अब सुरक्षित प्रसव और नवजात की किलकारी को लेकर नई उम्मीद जगी है।
संदेश:
गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच कराएं। हाई रिस्क गर्भावस्था की पहचान होने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहें और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार एवं संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करें।
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