बसपा के गढ़ में भाजपा की दस्तक, 2027 से पहले बदलेगा समीकरण?
मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र का फिरोजपुर गांव लंबे समय से अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र के रूप में राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र रहा है। मोहम्मदी ब्लॉक अंतर्गत आने वाला यह गांव बहुजन समाज पार्टी का परंपरागत गढ़ माना जाता रहा है। यदि पिछले पांच प्रमुख चुनावों के मतदान रुझानों पर नजर डालें तो लोकसभा चुनाव 2014, 2019 और 2024 तथा विधानसभा चुनाव 2017 और 2022 में यहां बसपा को बढ़त मिली। भाजपा को इस गांव में अपेक्षाकृत सीमित समर्थन प्राप्त हुआ था।
हालांकि हाल के दिनों में गांव की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिला है। ग्राम प्रधान रामजीवन गौतम, श्यामू मास्टर तथा भाजपा बूथ अध्यक्ष मंजीत समेत कई प्रभावशाली स्थानीय चेहरों का भाजपा के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्रीय विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह द्वारा इन प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कराए जाने को भी इसी राजनीतिक परिवर्तन की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से साधने की कोशिश में जुटी है। भाजपा का "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" का नारा तथा समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने की रणनीति इसके केंद्र में दिखाई देती है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले की भी लगातार चर्चा है। ऐसे में दलित बहुल गांवों में होने वाले राजनीतिक बदलावों को व्यापक दृष्टि से देखा जा रहा है।
क्षेत्र में हाल के वर्षों में हुए कुछ निर्णयों ने भी राजनीतिक माहौल को प्रभावित किया है। मियांपुर गांव में बंगाली समुदाय के लोगों को भूमि अधिकारों से जुड़े मामलों में राहत दिलाने के प्रयास, मियांपुर का नाम बदलकर रविन्द्र नगर किए जाने तथा मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं पहुंचकर विकास परियोजनाओं की सौगात देने जैसी घटनाओं को भाजपा समर्थक सामाजिक समावेशन और विकास की राजनीति से जोड़कर देखते हैं। इन योजनाओं का लाभ केवल एक गांव तक सीमित न रहकर आसपास के क्षेत्रों और कई जनपदों तक पहुंचा।
इसी क्रम में फिरोजपुर का नाम भी चर्चा में है। गोरखपुर क्षेत्र से विस्थापित परिवारों के बसाव वाले इस गांव में वन भूमि और पट्टा संबंधी विषय लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। यदि इन मामलों का समाधान निकलता है तो इसका प्रभाव केवल फिरोजपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश के अन्य ऐसे गांवों तक भी पहुंच सकता है जहां समान परिस्थितियां मौजूद हैं।
सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की दिशा में पासी समाज के सम्मेलन के दौरान विधायक द्वारा महाराजा बिजली पासी पार्क बनवाने की घोषणा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विधायक ने प्रयास जताया है कि इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कराया जाए।
हालांकि विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य राजनीतिक लाभ नहीं बल्कि जनसमस्याओं का समाधान है। उनके अनुसार, "मैं कोई भी कार्य राजनीतिक उद्देश्य से नहीं करता। लोगों की समस्याओं का निस्तारण हो, गांवों में विकास हो और लोग खुश रहें, यही प्राथमिकता है। वोटों की चिंता नहीं है।"
अब निगाहें वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव पर टिकी हैं। यह भविष्य के गर्भ में है कि फिरोजपुर जैसे गांवों में पारंपरिक राजनीतिक समर्थन कितना बदलता है, लेकिन इतना तय है कि इस गांव में शुरू हुई राजनीतिक हलचल ने मोहम्मदी विधानसभा की राजनीति को नई चर्चा जरूर दे दी है।