15 अगस्त पर खुली जेल के साथ रेलवे की जमीन पर स्मार्ट बाजार बनाने की मांग
सामाजिक कार्यकर्ता मनोज विकट बोले- अनुपयोगी पड़ी जमीन का हो सदुपयोग, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
बरेली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज विकट ने सरकार के सामने रेलवे की अनुपयोगी पड़ी जमीन के बेहतर इस्तेमाल की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार बीमार और वृद्ध कैदियों के लिए रिहाई तथा खुली जेल की व्यवस्था पर विचार कर रही है, उसी तरह रेलवे की शहरों और हाईवे के किनारे पड़ी जमीन को भी जनहित और रोजगार के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए। इस संबंध में मनोज विकट 15 अगस्त को सुबह 11 बजे सरकार को ज्ञापन सौंपेंगे।
मनोज विकट ने स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश के विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल जरूरी है। उन्होंने बताया कि रेलवे के पास करीब 4.99 लाख हेक्टेयर जमीन है। रेलवे की काफी जमीन शहरों, प्रमुख मार्गों और हाईवे के आसपास स्थित है। कई स्थानों पर यह जमीन लंबे समय से खाली या सीमित उपयोग में है। उनका सुझाव है कि ऐसी जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित कर वहां स्मार्ट कॉम्प्लेक्स, स्मार्ट बाजार और रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएं।
रेलवे की जमीन से बढ़ सकते हैं रोजगार के अवसर
मनोज विकट का कहना है कि रेलवे की जमीन पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त बाजार विकसित किए जाने से छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, स्वरोजगार करने वाले युवाओं और स्थानीय कारोबारियों को स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शहरों में बढ़ती आबादी और व्यापारिक गतिविधियों को देखते हुए सुनियोजित बाजारों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। यदि रेलवे की अनुपयोगी जमीन का चयन कर वहां स्मार्ट बाजार विकसित किए जाएं तो इससे रेलवे को भी राजस्व मिल सकता है और आम लोगों को व्यवस्थित बाजार की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।
खुली जेल की व्यवस्था का भी किया उल्लेख
मनोज विकट ने कहा कि सरकार बीमार और वृद्ध कैदियों को राहत देने तथा खुली जेलों की व्यवस्था पर काम कर रही है। खुली जेल के मॉडल में पात्र कैदी दिन के समय काम कर सकते हैं और निर्धारित समय पर वापस जेल लौटते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्थाओं का उद्देश्य सुधार, पुनर्वास और समाज से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने इसी विचार को व्यापक विकास की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि अनुपयोगी सरकारी संपत्तियों का भी जनहित में उपयोग होना चाहिए। रेलवे की जमीन पर स्मार्ट बाजार और कॉम्प्लेक्स विकसित किए जाने से जमीन बेकार पड़े रहने के बजाय आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन सकती है।
15 अगस्त को सौंपेंगे ज्ञापन
मनोज विकट ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर वह 15 अगस्त को सुबह 11 बजे सरकार को ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन के माध्यम से रेलवे की अनुपयोगी जमीन का सर्वे कराकर शहरों और हाईवे के आसपास उपयुक्त स्थानों को चिह्नित करने, वहां स्मार्ट बाजार एवं कॉम्प्लेक्स विकसित करने तथा स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यापार के अवसर देने की मांग रखी जाएगी।
इसके साथ ही मनोज विकट ने विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किए जाने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि देश और समाज के विकास में योगदान देने वाले अधिकारियों का सम्मान करने से अन्य लोगों को भी बेहतर कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।
बाइट : मनोज विकट, सामाजिक कार्यकर्ता
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