उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘पंडित पॉलिटिक्स’ फिर केंद्र में आ गई है। कांग्रेस ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को यूपी कांग्रेस की कमान सौंपकर और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पारंपरिक ब्राह्मण-मुस्लिम गठजोड़ को नए सिरे से साधने का दांव चला है। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी से नाराज चल रहे गोरखपुर के डॉ. संजयन त्रिपाठी को अपने पाले में लेकर अखिलेश यादव ने एमएलसी प्रत्याशी बना दिया है। सपा अपने ‘PDA’ समीकरण में अब ब्राह्मण मतदाताओं को भी जोड़ने की सक्रिय कोशिश कर रही है।
बीजेपी के एक दशक लंबे दबदबे के बाद अब विपक्ष सत्ता में ब्राह्मण समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व के सवाल को धार दे रहा है। 2027 की सियासी बिसात पर विपक्ष की यह रणनीति बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग के सामने कितनी बड़ी चुनौती खड़ी करेगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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