सोनम वांगचुक जी व अन्य प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। सोनम वांगचुक जी को हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया है और बाकी प्रर्दशनकारियों को भी हटाया जा रहा है।
लोकतंत्र की असली ताकत असहमति को सुनने में होती है, उसे बलपूर्वक दबाने में नहीं। यदि शांतिपूर्ण विरोध भी असहनीय हो जाए, तो यह संविधान की भावना और नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए चिंताजनक संकेत है।
लोकतंत्र संवाद से चलता है, दमन से नहीं।
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Sahaswan, Budaun | Jul 18, 2026