बच्चे पढ़ते हैं एडवर्ड स्कूल में, लेकिन कुछ पेरेंट्स की हरकतें देखकर लगता है कि पढ़ाई सिर्फ बच्चों ने की है, पेरेंट्स ने नहीं!
मामला बहुत साफ है। एडवर्ड स्कूल के बच्चे आज पिकनिक पर चंडीगढ़ गए थे। बच्चों को लेने आने वाले पेरेंट्स को स्कूल ने बाकायदा पहले ही मैसेज भेज दिया था कि आप रात को बच्चे लेते समय स्कूल के पास अपनी गाड़ियाँ पार्क न करें। अब सवाल यह है कि जब स्कूल ने इतनी साफ हिदायत दी थी, तो कुछ पेरेंट्स ने उसे मानना भी जरूरी नहीं समझा? भाई, आप अपने बच्चे को महंगे स्कूल में पढ़ा रहे हो, लेकिन सड़क पर गाड़ी कहाँ खड़ी करनी है—इतनी सामान्य समझ भी नहीं है? आपकी सुविधा के लिए सड़क पर गाड़ी खड़ी होगी, ट्रैफिक रुकेगा, जाम लगेगा और परेशानी शिमला की पूरी जनता को होगी।
फिर हम व्यवस्था को दोष देंगे, ट्रैफिक पुलिस को दोष देंगे और शहर के जाम को लेकर शिकायत करेंगे।
जरा अपने अंदर भी झाँकिए।
स्कूल ने मैसेज भेजकर जिम्मेदारी निभा दी थी। अब पेरेंट्स की जिम्मेदारी थी कि उस निर्देश का सम्मान करते। बच्चों को अच्छी शिक्षा देना जरूरी है, लेकिन सड़क पर अनुशासन, दूसरों के समय की कद्र और सार्वजनिक जगह की जिम्मेदारी समझना भी शिक्षा का ही हिस्सा है।
एडवर्ड में बच्चा पढ़ रहा है तो इसका मतलब यह नहीं कि स्कूल के बाहर सड़क आपकी निजी पार्किंग बन गई।
कुछ मिनट की अपनी सुविधा के लिए पूरे शहर को परेशान करना समझदारी नहीं, सीधी लापरवाही है।
पहले बच्चों को पढ़ाइए, और साथ-साथ खुद भी ट्रैफिक अनुशासन का पाठ पढ़िए।