केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाँव बाँध और ललितपुर-सिंगरौली रेल मार्ग से बेदखल हो रहे ग्रामीणों का 'चिता आंदोलन' आज 7वें दिन भीषण जनाक्रोश में बदल गया है। डूब क्षेत्र में आ चुके विस्थापित जब बिना मुआवजा, पारदर्शी पुनर्वास और सामाजिक आकलन के अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे थे, तब पन्ना दौरे पर आए सागर संभाग के कमिश्नर दिलीप कुमार के एक विवादित बयान ने जलते घावों पर नमक छिड़क दिया। पन्ना दौरे पर पहुँचे कमिश्नर ने आंदोलनकारियों के अस्तित्व को ही नकारते हुए उन्हें "गैर-विस्थापित" करार दे दिया, जिसके बाद प्रभावितों की भीड़ 500 से बढ़कर अचानक 1300 के पार पहुँच गई।
किसान नेता अमित भटनागर का कहना है कि जब स्वयं प्रशासनिक टीम ने मौके पर 150 से अधिक प्रभावितों के नाम दर्ज किए हैं, तो इतने बड़े अधिकारी का यह बयान संवेदनहीनता और छुपाव की पराकाष्ठा है। ग्रामीणों के घरों में पानी भर रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 12.50 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता 2 महीने बाद भी नदारद है; कई परिवारों को 8 साल पुराना 5 लाख का मुआवजा तक नहीं मिला। अधिकार माँगने पर बिजली-पानी काटकर लोकतांत्रिक आवाज को दबाने की कोशिशों के बीच अब विस्थापितों ने रात में भी अनवरत आंदोलन जारी रखते हुए मशाल जुलूस निकाल दिया है। जब तक हर प्रभावित परिवार को पारदर्शी सर्वे, पूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है।
Panna, Panna | Sep 18, 2026