गुरु पूर्णिमा पखवाड़े के अंतर्गत शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अबगांव कला में
प्रथम दिवस गुरु पूर्णिमा पखवाड़े का शुभारंभ प्राचार्य श्री अजय पाराशर, प्रधान पाठक द्वय श्री संजय अग्रवाल एवं श्रीमती विनीता श्रीवास्तव के द्वारा दीप प्रज्वलित कर विद्या की देवी मां सरस्वती की वंदना, एवं गुरु वंदना के साथ किया गया । प्राचार्य महोदय एवं शिक्षकों के द्वारा गुरु शिष्य परंपरा और गुरु का जीवन में क्या महत्व है एवं भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु की भूमिका व योगदान पर विस्तार पूर्वक समझाया गया। जीवन के हर क्षण पर गुरु का मार्गदर्शन किस प्रकार उपयोगी हो सकता है जिससे जीवन जीने की कला सीखने के साथ-साथ आने वाली कठिनाइयों को किस प्रकार सरलतम किया जा सकता है इत्यादि विषयों पर विचार रखे गए। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपने सभी शिक्षकों को तिलक लगाकर अभिवादन किया एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। द्वितीय दिवस अंतर विद्यालय भ्रमण के अंतर्गत सांदीपनि विद्यालय में तहसील के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हंडिया, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेड़ा, एवं शासकीय हाई स्कूल रिजगांव के विद्यार्थी उपस्थित हुए जिन्होंने विद्यालय का भ्रमण किया जिसके विद्यालय प्रांगण, प्रयोगशाला कंप्यूटर प्रयोगशाला, तथा संगीत शाला आदि का अवलोकन किया। इसी तारतम्य में विद्यालय के व्याख्याता संतोष कुमार मालवीय द्वारा विद्यार्थियों को गुरु शिष्य परंपरा एवं भारतीय सनातन संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने हेतु स्वयं को संस्कृतिनिष्ठ सुसंस्कृत एवं सुसभ्य बनाने के लिए स्वाध्याय के महत्व पर विशेष व्याख्यान दिया। जीवन में आने वाली कठिनाइयों को किस प्रकार हम अपनी विनम्रता, कार्य कुशलता, व्यवहारिकता एवं सदाचार द्वारा सरलतम करते हुए अपने उद्देश्य एवं लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर राष्ट्र को सशक्त एवं समृद्ध बना सकते हैं।
तृतीय दिवस गुरु शिष्य परंपरा एवं गुरु का जीवन में महत्व विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साह व उमंगके साथ भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया एवं इस दौरान बताया कि गुरु हमारे जीवन के मार्गदर्शक होते हैं तथा गुरु के माध्यम से ही हम ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं।
गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागू पांव,
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए। जीवन में गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है जो हमें ईश्वर के समीप ले जाने में मदद करने के साथ-साथ जीवन के समस्त कौशल सीखने में मदद करते हैं। गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर है ऐसा कहा जाता है। हिंदी की व्याख्याता श्रीमती शशि कला गौर एवं श्रीमती छाया राठौर के द्वारा भी गुरु शिष्य परंपरा पर अपने विचार व्यक्त किए गए एवं गुरु के महत्व को सर्वोपरि मानते हुए विद्यार्थियों को बताया कि प्रथम गुरु हमारी माँ होती है । हमें अपने माता-पिता एवं वरिष्ठ जनों का सदैव सम्मान करना चाहिए। चतुर्थ दिवस गुरु का जीवन में महत्व ,गुरु शिष्य परंपरा पर आधारित निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर के हिस्सा लिया और गुरु के महत्व को जानने का एक अप्रतिम प्रयास किया इस अवसर पर श्रीमती दीपा श्री दिनेश चौहान द्वारा निबंध प्रतियोगिता का सुचारू व्यवस्थापन कर विद्यार्थियों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इसी अवसर में विद्यालय में सेवानिवृत शिक्षक एवं आध्यात्मिक गुरु श्री चंपालाल जी ठाकुर ,श्री तिवारी , श्री भागीरथ पटेल एवं ग्राम के गणमान्य जन उपस्थित हुए जिन्होंने विद्यार्थियों को गुरु शिष्य परंपरा का निर्वहन करने का संदेश दिया और मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कृत करने के साथ-साथ प्राचार्य एवं गणित विज्ञान विषयों का अध्यापन कराने वाले शिक्षकों को भी पुरस्कृत किया।
श्री चंपालाल जी ठाकुर सेवानिवृत्ति शिक्षक के द्वारा विद्यार्थियों को राम नाम जप तथा राम के चरित्र को अपने जीवन में अपनाने का आग्रह किया इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य जनों के द्वारा विद्यालय में पौधारोपण कर प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए विद्यार्थियों को वृक्षों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर पर्यावरण शपथ लेकर विद्यार्थियों ने अपने जीवन में एक पेड़ लगाने का संकल्प लिया। इस शुभ अवसर पर विद्यालय में के प्राचार्य एवं शिक्षकों द्वारा उपस्थित अतिथियों एवं नव आगंतुक नवनियुक्त शिक्षको श्री विवेक जोशी ,श्री अख्तर खान, श्रीमती चेतना चौधरी, श्रीमती दीपा श्रीमती विमला परमार एवं श्री राघवेंद्र परमार को अखंड ज्योति पत्रिका एवं श्रीफल प्रदान कर सम्मानित किया ।कार्यक्रम के अंत में श्रीमती सविता तारे व्याख्याता द्वारा आभार व्यक्त किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के श्रीमती भारती हरने, श्रीमती सारिका शर्मा,श्रीमती आरती जोशी, श्रीमती स्वाती सौदावत, श्री देवेंद्र बरपेटे,श्री अनिल डहारे,श्री गौरी शंकर भैंसारे, श्री जयप्रकाश पाराशर, सुश्री प्रशंसा साकेरिया,सुश्री स्वाति पटले, श्रीमती अनीता भल्लावी, श्री गंगाराम सरवरे, आदि का उल्लेखनीय योगदान रहा।
Harda, Harda | Jul 20, 2026