परिजनों ने ठुकराया, ढाबा संचालक बना सहारा; 90 वर्षीय पूर्व सैनिक की कहानी ने भावुक किया
श्रीनगर। ग्राम मंगसू चौरास निवासी लगभग 90 वर्षीय पूर्व सैनिक प्रताप सिंह परमार की कहानी ने एक बार फिर रिश्तों और मानवता के मायनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त प्रताप सिंह परमार वर्ष 2000 के आसपास अपने परिवार से बिछड़ गए थे और तब से उनका परिवार से संपर्क टूट गया।
वर्तमान में वह पंजाब के मुकेरियां क्षेत्र स्थित एक ढाबे में काम कर अपना जीवनयापन कर रहे हैं। बताया जाता है कि उनके पुत्र विनोद परमार रुद्रप्रयाग में अध्यापक हैं, लेकिन वर्षों से परिवार और बुजुर्ग के बीच कोई संपर्क नहीं रहा।
हाल ही में सोशल मीडिया मंच ‘बदलता श्रीनगर’ के प्रयासों से प्रताप सिंह परमार और उनके परिजनों को मिलाने की कोशिश की गई। हालांकि हैरानी की बात यह रही कि बुजुर्ग ने स्वयं भी घर लौटने की इच्छा नहीं जताई, जबकि परिजनों ने भी उन्हें अपने साथ ले जाने से साफ इंकार कर दिया।
ऐसे कठिन समय में मुकेरियां के ढाबा संचालक ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए कहा कि वह प्रताप सिंह परमार की देखभाल अपने पिता और बेटे की तरह करेंगे तथा उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने देंगे।
यह घटना न केवल पारिवारिक रिश्तों की बदलती तस्वीर को सामने लाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि रक्त संबंधों से बढ़कर इंसानियत का रिश्ता होता है। जब अपने साथ छोड़ दें, तब कभी-कभी गैर लोग ही सबसे बड़ा सहारा बन जाते हैं।
Parliament Street, New Delhi | Jun 17, 2026