शासकीय महाविद्यालय विजयराघवगढ़ में विद्यार्थियों को दिया गया जैविक खेती का तकनीकी प्रशिक्षण
कटनी (12 अक्टूबर) - नई शिक्षा नीति के अंतर्गत विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ जैविक खेती की तकनीक से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासकीय महाविद्यालय विजयराघवगढ़ में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार सिंह के मार्गदर्शन में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे विद्यार्थियों को कम लागत वाली प्राकृतिक एवं जैविक कृषि पद्धतियों की तकनीकी जानकारी दे रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को जीरो बजट फार्मिंग के अंतर्गत फसल चक्र, मिश्रित खेती, अंतरफसल पद्धति और बहुफसली कृषि पद्धति के बारे में विस्तार से समझाया गया। साथ ही, मुख्य फसलों के साथ नगदी फसलों की खेती कर अतिरिक्त आय अर्जित करने के तरीके भी बताए गए। विद्यार्थियों को बताया गया कि वैज्ञानिक तरीके से फसलों का चयन और खेत में विभिन्न फसलों का समन्वित उत्पादन करने से कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे खेती की लागत कम करने के साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
फसल चक्र की उपयोगिता समझाते हुए विशेषज्ञ ने बताया कि खेत में लगातार एक ही प्रकार की फसल लगाने के बजाय अलग-अलग फसलों को निर्धारित क्रम में बोना चाहिए। विशेष रूप से एकदलीय फसलों के बाद दलहनी फसलों की खेती करने से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलती है। दलहनी फसलों की जड़ों में गांठें होती हैं, जिनमें राइजोबियम जैसे उपयोगी सूक्ष्मजीव वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है और अगली फसल में नाइट्रोजन उर्वरक की आवश्यकता कम हो सकती है।
प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को बताया गया कि फसल चक्र, मिश्रित खेती और अंतरफसल जैसी पद्धतियां अपनाकर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और खेती की लागत घटाने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।
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1 views | Katni, Madhya Pradesh | Oct 12, 2026