#जिले_में_सोयाबीन_की_अर्ली_किस्मों_की_कटाई_शुरू*
*जिला स्तरीय डायग्नोस्टिक दल ने खेतों में पहुंचकर लिया फसल स्थिति का जायजा, किसानों को कटाई एवं आगामी रबी फसल के लिए दी सलाह*
उज्जैन 23 सितंबर। जिले में सोयाबीन की अर्ली प्रजातियों की फसल की कटाई का कार्य प्रारंभ हो गया है। कलेक्टर महोदय के निर्देशानुसार एवं उपसंचालक कृषि श्री के.एस. कैन के मार्गदर्शन में जिला स्तरीय डायग्नोस्टिक दल ने विकासखंड तराना एवं उज्जैन के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण कर सोयाबीन फसल की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।
दल द्वारा ग्राम कायथा, रामपुरा, जवासिया कुमार, पिपलिया, लक्ष्मीपुरा, लिमोदा, हरसौदन सहित आसपास के ग्रामों में खेतों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान किसानों से सीधे चर्चा कर फसल की स्थिति, उत्पादन एवं फसल कटाई से संबंधित समस्याओं की जानकारी ली गई।
3 से 5 क्विंटल प्रति बीघा तक उत्पादन
किसानों से चर्चा एवं खेतों के निरीक्षण के आधार पर इस वर्ष अर्ली प्रजाति की सोयाबीन फसल का उत्पादन औसतन 3 से 5 क्विंटल प्रति बीघा तक प्राप्त होने की जानकारी सामने आई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए जिले में सोयाबीन फसल का उत्पादन संतोषजनक बताया जा रहा है।
मजदूरों से कटाई को प्राथमिकता देने की सलाह
डायग्नोस्टिक दल ने किसानों को सलाह दी कि सोयाबीन की कटाई यथासंभव मजदूरों के माध्यम से की जाए। हार्वेस्टर से कटाई के दौरान कई बार सोयाबीन के दाने खेत में बिखरने की संभावना रहती है, जिससे उपज का नुकसान हो सकता है।
यदि हार्वेस्टर से कटाई करना आवश्यक हो तो किसानों को सलाह दी गई कि वे हार्वेस्टर संचालक से एसएमएस (Straw Management System) युक्त हार्वेस्टर से कटाई करवाएं। इससे सोयाबीन का भूसा छोटे-छोटे टुकड़ों में कटकर खेत में ही फैल जाता है और खेत में कार्बनिक पदार्थ की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे आगामी फसल के लिए भी खेत की मिट्टी को लाभ मिल सकता है।
रबी में कम पानी वाली फसलों को दें प्राथमिकता
दल द्वारा किसानों को आगामी रबी मौसम की तैयारी के संबंध में भी महत्वपूर्ण सलाह दी गई। कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों को गेहूं के साथ चना, मसूर, सरसों एवं अलसी जैसी अपेक्षाकृत कम पानी वाली फसलों को भी फसल विविधीकरण के रूप में अपनाने की सलाह दी गई।
कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने किसानों से कहा कि आगामी रबी मौसम में उपलब्ध सिंचाई जल, कृषि संसाधनों एवं लागत को ध्यान में रखते हुए फसलों का चयन करें, ताकि कम पानी में भी बेहतर उत्पादन एवं आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
जिला डायग्नोस्टिक दल का भ्रमण उपसंचालक कृषि श्री के.एस. कैन एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.के. दीक्षित के मार्गदर्शन में किया गया। दल में नोडल अधिकारी एवं सहायक संचालक कृषि श्री कमलेश कुमार राठौर सहित कृषि विभाग के अधिकारी एवं स्थानीय कृषक उपस्थित रहे।
Dr Mohan Yadav
CM Madhya Pradesh
Department of Agriculture, Madhya Pradesh
Jansampark Madhya Pradesh
Collector Office Ujjain
1 views | Umaria, Madhya Pradesh | Sep 23, 2026