नगर पालिका जांच में हंगामा: रिकॉर्ड पर ताला, बाबू गायब, ईओ पर गंभीर आरोप; कथित 'विज्ञापन समर्थित' पत्रकारों की भूमिका पर भी उठे सवाल
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उरई। नगर पालिका में वित्तीय अनियमितताओं की जांच के दौरान बुधवार को ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जांच टीम के पहुंचते ही आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने के बजाय कार्यालयों में ताले लटकने लगे, कई बाबू और अधिकारी कथित रूप से कार्यालय छोड़कर चले गए तथा जांच प्रक्रिया बाधित होने के आरोप लगे।
जांच के दौरान ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही ने स्वयं मीडिया के सामने आरोप लगाया कि उन्हें कथित रूप से रिश्वत देने की पेशकश की गई, जिसे उन्होंने सिरे से ठुकरा दिया। इसके साथ ही रिकॉर्ड उपलब्ध न कराने और जांच में सहयोग न करने के आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि कुछ कथित पत्रकार, जिन्हें नगर पालिका से विज्ञापन मिलने की बात कही जा रही है, जांच प्रक्रिया के दौरान निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय अधिशासी अधिकारी के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। आरोप है कि इन लोगों ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) की भावना की अनदेखी की और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 74 के अंतर्गत सार्वजनिक अभिलेखों की उपलब्धता और पारदर्शिता के सिद्धांतों की भी अनदेखी की।
शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि जांच के दौरान कुछ ठेकेदार अधिशासी अधिकारी के बचाव में सक्रिय दिखाई दिए और शिकायत करने वाले सभासदों पर दबाव बनाने तथा विवाद की स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास किया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिन सभासदों ने कथित वित्तीय अनियमितताओं और गबन की शिकायत की, उन्हीं को निशाना बनाया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अभिलेखों में कोई अनियमितता नहीं थी तो रिकॉर्ड उपलब्ध कराने से परहेज क्यों किया गया? कार्यालयों में ताले क्यों लगाए गए? अधिकारी और कर्मचारी जांच के समय कार्यालय छोड़कर क्यों चले गए? इन सवालों के जवाब अब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
हालांकि, अधिशासी अधिकारी, संबंधित पत्रकारों और ठेकेदारों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
Orai, Jalaun | Jul 29, 2026