सिहोरा: परंपरागत जल स्रोतों की उपेक्षा, जल संरक्षण केवल कागजों तक सीमित
नगर में परंपरागत जल स्रोतों की खासी उपेक्षा हो रही है। पुर्व में कुएं, तालाब और बावड़ी जैसे जल स्रोत न केवल बर्ष भर पानी उपलब्ध कराते थे, बल्कि बारिश का पानी जमीन के भीतर पहुंचा कर जल संरक्षण व संवर्धन में भी मुख्य भूमिका का निर्वहन करते थे। लेकिन समय के साथ आए बदलाव ने इन जल स्रोतों को कूड़ेदान बना दिया। परिणाम स्वरूप नतीजा यह है कि जल स्तर लगातार पाताल की ओर