वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान में दिखी जनभागीदारी, प्राचीन बावड़ी को सहेजने जुटा पूरा गांव,जनभागीदारी से बनाएंगे बूंदी को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ शहर – जिला कलक्टर
वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत हुआ प्रेसवार्ता का आयोजन
बूंदी, 5 जून। वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान ने अब एक जन आंदोलन का रूप ले लिया है। अभियान के तहत न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐतिहासिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए आमजन बढ़-चढ़कर श्रमदान कर रहे हैं। जिला कलक्टर हरफूल सिंह यादव ने अभियान की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य आम आदमी को जल संरक्षण की भावना के साथ जोड़ना था, जो पूरी तरह से सफल रहा है। यह जानकारी जिला कलक्टर ने शुक्रवार को वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान प्रेस एवं मीडिया प्रतिनिधियों के साथ साझा की।
जिला कलक्टर ने बताया कि जिले के सभी विभागों ने पूरे उत्साह के साथ अपनी आवंटित गतिविधियों को निर्धारित तरीके से आयोजित किया है। 'बावड़ियों के शहर' बूंदी के साथ-साथ जिले के विभिन्न गांवों में स्थित तालाबों, झीलों और पुरानी ऐतिहासिक बावड़ियों पर विशेष फोकस रखा गया है। इन सभी जल स्रोतों पर वृहद स्तर पर श्रमदान की गतिविधियां आयोजित की गई हैं।
जिला कलक्टर यादव ने तालेड़ा तहसील के सींता गांव का जिक्र करते हुए बताया कि यहां जल संरक्षण की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली। गांव में स्थित सैकड़ों साल पुरानी बावड़ी के साफ-सफाई कार्यक्रम में माननीय प्रभारी मंत्री हीरालाल नागर ने भी शिरकत की और सामूहिक श्रमदान किया। बावड़ी के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए जिला कलक्टर ने बताया कि यह बावड़ी गांव की स्थापना के समय की है, जो करीब 500 से 700 साल पुरानी बताई जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 30 साल पहले तक यह बावड़ी ही पूरे गांव के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत हुआ करती थी। समय के साथ इसमें गाद भर गई और दीवारें कमजोर होकर ढहने लगीं। इसे देखते हुए माननीय लोकसभा अध्यक्ष ने अपने सांसद कोटे से इसके पूर्ण जीर्णोद्धार और सुरक्षा दीवार के निर्माण के लिए बजट आवंटित किया है, जिससे इसका कायाकल्प किया जा रहा है।
उन्होंने विगत 26 मई को हुए सामूहिक श्रमदान का अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस दिन पूरे गांव ने एकजुट होकर बावड़ी के अंदर से गाद निकालने का कार्य किया। ग्रामीणों की यह भावना अत्यंत प्रेरणादायक थी कि भले ही आज 'नल जल योजना' और अन्य व्यवस्थाओं के कारण वे इस बावड़ी का पानी नहीं पीते, लेकिन यह उनके बुजुर्गों और पीढ़ियों की धरोहर है। आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत के रूप में ग्रामीण इस ऐतिहासिक जल स्रोत का पूरे मनोयोग से जीर्णोद्धार कर रहे हैं।
जनभागीदारी से बनाएंगे बूंदी को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ शहर
जिला कलक्टर ने कहा कि जन भागीदारी से बूंदी को प्लास्टिक मुक्त और स्वच्छ शहर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि आमजन के सक्रिय सहयोग से ही बूंदी शहर को पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सकता है। शहर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है।जिला कलक्टर ने 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' और पर्यावरण संरक्षण के तहत जिले भर में चल रही विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस जन अभियान को सफल बनाने में जिले के विभिन्न विभागों के बीच बेहतरीन समन्वय देखने को मिला है। इसी आपसी तालमेल और सुनियोजित कार्ययोजना का परिणाम है कि जिले में जल संरक्षण के कई महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं।
उन्होंने बूंदी की ऐतिहासिक धरोहरों का जिक्र करते हुए आमजन से एक खास अपील की। उन्होंने कहा कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद पारंपरिक जल स्रोतों, विशेषकर तालाबों और पुरानी बावड़ियों की साफ-सफाई में लोग श्रमदान करें। जनभागीदारी से ही इन ऐतिहासिक जल स्रोतों को उनके मूल स्वरूप में लौटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जल और पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। आमजन के सहयोग और जागरूकता से बूंदी को एक साफ, सुंदर और आदर्श शहर के रूप में विकसित किया जाएगा।