ग्रहण समाप्त होते ही मंदिर प्रशासन और पुजारियों द्वारा संपूर्ण मंदिर परिसर की विधिवत धुलाई की गई। मंदिर का शिखर, नंदी हॉल,गर्भगृह, सभामंडप और अन्य हिस्सों को पवित्र जल से शुद्ध किया गया। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकालेश्वर का विशेष जलाभिषेक कराया गया। मंगलवार 7:00 बजे के लगभग मंदिर के पुजारी ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रहण के बाद परंपर