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बगहा: अभिनेता/जिलाध्यक्ष कला संस्कृति प्रकोष्ठ प० चंपारण। कृपया मुझे फॉलो करें.. #intro #news#वायरल_वीडियो #वायरल_वीडियो

7.5k views | Bagaha, West Champaran | Jun 29, 2021

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गंडक में लौटी घड़ियालों की किलकारी, पहले घोंसले से निकले 31 शावक, संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता, गंडक नदी में सुरक्षित छोड़े गए नवजात घड़ियाल।

बेतिया।  गंडक नदी एक बार फिर घड़ियाल संरक्षण की मिसाल बनकर उभरी है। वर्ष 2026 के प्रजनन सत्र में बेतिया वन प्रमंडल के बगहा रेंज अंतर्गत रतवल पुल के समीप स्थित पहले घड़ियाल घोंसले से 31 शावकों का सफल उद्भवन हुआ है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने न केवल वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों को उत्साहित किया है, बल्कि गंडक नदी को देश में घड़ियालों के प्रमुख प्राकृतिक आवास के रूप में और मजबूत पहचान दिलाई है। उद्भवन के बाद सभी नवजात शावकों को बिहार वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की संयुक्त देखरेख में उनके प्राकृतिक आवास गंडक नदी में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया। इस दौरान क्षेत्र निदेशक (सीएफ) गौरव ओझा, वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) पंकज कुमार, वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी मलाकार, वन विभाग के अधिकारी-कर्मी तथा डब्ल्यूटीआई के प्रतिनिधि मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि यह सफलता लंबे समय से चल रहे संरक्षण, निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन का परिणाम है। घोंसले की पहचान अप्रैल और मई माह में वन विभाग तथा डब्ल्यूटीआई द्वारा किए गए संयुक्त सर्वेक्षण के दौरान हुई थी। इसके बाद घोंसले को विशेष सुरक्षा प्रदान की गई और नियमित निगरानी की गई, जिससे अंडों का सुरक्षित विकास संभव हो सका। वन विभाग के अनुसार, वर्तमान प्रजनन सत्र में अब तक गंडक नदी में कुल पांच घड़ियाल घोंसलों की पहचान की जा चुकी है। इन सभी स्थलों की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि अंडों और नवजात शावकों को प्राकृतिक या मानवीय खतरों से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि घोंसलों की बढ़ती संख्या नदी के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और सफल संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक संकेत है। गौरतलब है कि घड़ियाल विश्व की सबसे दुर्लभ और अत्यंत संकटग्रस्त सरीसृप प्रजातियों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने इसे ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ अर्थात अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। वहीं भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। पिछले एक दशक से बिहार वन विभाग और डब्ल्यूटीआई गंडक नदी में घड़ियाल संरक्षण के लिए संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। चंबल नदी के बाद गंडक आज देश में घड़ियालों का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास मानी जाती है। 31 शावकों का सफल उद्भवन इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने घड़ियालों के सुरक्षित भविष्य की नई उम्मीद जगाई है।

गंडक में लौटी घड़ियालों की किलकारी, पहले घोंसले से निकले 31 शावक, संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता, गंडक नदी में सुरक्षित छोड़े गए नवजात घड़ियाल। बेतिया। गंडक नदी एक बार फिर घड़ियाल संरक्षण की मिसाल बनकर उभरी है। वर्ष 2026 के प्रजनन सत्र में बेतिया वन प्रमंडल के बगहा रेंज अंतर्गत रतवल पुल के समीप स्थित पहले घड़ियाल घोंसले से 31 शावकों का सफल उद्भवन हुआ है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि ने न केवल वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों को उत्साहित किया है, बल्कि गंडक नदी को देश में घड़ियालों के प्रमुख प्राकृतिक आवास के रूप में और मजबूत पहचान दिलाई है। उद्भवन के बाद सभी नवजात शावकों को बिहार वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की संयुक्त देखरेख में उनके प्राकृतिक आवास गंडक नदी में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया गया। इस दौरान क्षेत्र निदेशक (सीएफ) गौरव ओझा, वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) पंकज कुमार, वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी मलाकार, वन विभाग के अधिकारी-कर्मी तथा डब्ल्यूटीआई के प्रतिनिधि मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि यह सफलता लंबे समय से चल रहे संरक्षण, निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन का परिणाम है। घोंसले की पहचान अप्रैल और मई माह में वन विभाग तथा डब्ल्यूटीआई द्वारा किए गए संयुक्त सर्वेक्षण के दौरान हुई थी। इसके बाद घोंसले को विशेष सुरक्षा प्रदान की गई और नियमित निगरानी की गई, जिससे अंडों का सुरक्षित विकास संभव हो सका। वन विभाग के अनुसार, वर्तमान प्रजनन सत्र में अब तक गंडक नदी में कुल पांच घड़ियाल घोंसलों की पहचान की जा चुकी है। इन सभी स्थलों की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि अंडों और नवजात शावकों को प्राकृतिक या मानवीय खतरों से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि घोंसलों की बढ़ती संख्या नदी के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और सफल संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक संकेत है। गौरतलब है कि घड़ियाल विश्व की सबसे दुर्लभ और अत्यंत संकटग्रस्त सरीसृप प्रजातियों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने इसे ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ अर्थात अत्यंत संकटग्रस्त श्रेणी में रखा है। वहीं भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च स्तर का कानूनी संरक्षण प्राप्त है। पिछले एक दशक से बिहार वन विभाग और डब्ल्यूटीआई गंडक नदी में घड़ियाल संरक्षण के लिए संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। चंबल नदी के बाद गंडक आज देश में घड़ियालों का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास मानी जाती है। 31 शावकों का सफल उद्भवन इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने घड़ियालों के सुरक्षित भविष्य की नई उम्मीद जगाई है।

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