✅ निमाड़ की लोककलाओं और संत सिंगाजी की महिमा से सजा ‘खेती खेड़ा हरिनाम की’ उत्सव
✅ लोकगायन और पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
✅ संत सिंगाजी के जीवन पर आधारित नृत्य-नाट्य ने किया भावविभोर
मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन हरदा के सहयोग से श्रीकान्हा बाबा मंदिर परिसर, सोनतलपुर में 10 एवं 11 अक्टूबर को आयोजित दो दिवसीय ‘खेती खेड़ा हरिनाम की’ उत्सव निमाड़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक संगीत और जनजातीय लोकनृत्यों की मनोहारी प्रस्तुतियों का साक्षी बना। दोनों दिन शाम 6:30 बजे से आयोजित कार्यक्रमों में लोककलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं को जीवंत किया।
उत्सव के प्रथम दिवस 10 अक्टूबर को निमाड़ी गायन, देव भीलट गायन, गदली नृत्य, झंडा नृत्य, काठी नृत्य और गणगौर नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। शिवप्रसाद सांखला एवं साथी ने निमाड़ी गायन, धर्मेंद्र राजपूत ने देव भीलट गायन, सतीश इवने एवं साथी ने कोरकू जनजातीय गदली नृत्य, सोनू काजवे एवं साथी ने झंडा नृत्य, अशोक मौर्य एवं साथी ने काठी नृत्य तथा मीशा शर्मा एवं साथी ने गणगौर नृत्य प्रस्तुत किया। कलाकारों की प्रस्तुतियों में निमाड़ की लोकपरंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिली।
✅ संत सिंगाजी के जीवन पर केंद्रित रही नृत्य-नाट्य प्रस्तुति
उत्सव के दूसरे दिन 11 अक्टूबर को ‘खेती खेड़ो हरि नाम की’ शीर्षक से विशेष नृत्य-नाट्य प्रस्तुति आयोजित की गई। इसमें संत सिंगाजी के जीवन, उनके आध्यात्मिक विचारों और समाज के प्रति योगदान को कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया। नृत्य, संगीत और अभिनय के समन्वय से सजी इस प्रस्तुति ने संत सिंगाजी की आध्यात्मिक विरासत और निमाड़ की भक्ति परंपरा को रेखांकित किया। नृत्य-नाट्य का निर्देशन चंद्रमाधव वारिक, संगीत निर्देशन कुलदीप सारवा तथा लेखन श्रीराम पाटीदार एवं योगेश त्रिपाठी ने किया।
✅ लोकसंस्कृति के संरक्षण का प्रयास
‘खेती खेड़ा हरिनाम की’ उत्सव निमाड़ अंचल की लोककलाओं, जनजातीय नृत्यों और पारंपरिक गायन को मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन रहा। ऐसे आयोजनों से लोककलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोकपरंपराओं और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।
आयोजन मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन हरदा के सहयोग से किया गया।
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Harda, Madhya Pradesh | Oct 11, 2026