डीएपी के विकल्प, नैनो उर्वरकों एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि अधिकारियों का भव्य प्रशिक्षण आयोजित
भिवानी, 19 जुलाई। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के संयुक्त तत्वावधान में पंचायत भवन में "नैनो उर्वरकों के प्रभावी उपयोग एवं प्रचार-प्रसार" विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के लगभग 300 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों तक डीएपी के विकल्प, नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती का संदेश प्रभावी ढंग से पहुँचाना था।
कार्यक्रम का शुभारम्भ इफको के क्षेत्रीय अधिकारी सुरजीत राठी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ किया। उन्होंने कहा कि कृषि अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से ही किसानों तक आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों का प्रभावी प्रसार संभव है। इफको गुरुग्राम के क्षेत्रीय प्रबंधक हितेन्द्र सिंह ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी सहित नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इनके प्रयोग से पोषक तत्वों की उपयोग दक्षता बढ़ती है, रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है, उत्पादन लागत घटती है तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।
डॉ. ममता फोगाट, मृदा वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र ने मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर बल देते हुए कहा कि स्वस्थ मृदा ही टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि की आधारशिला है।
डाॅ. सुमित भारद्वाज, एसएमएस (प्रशिक्षण एवं विस्तार), कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी देते हुए अधिकारियों से योजनाओं का अधिकतम लाभ किसानों तक पहुँचाने का आह्वान किया।
डाॅ. अनिल राठी, जिला मृदा परीक्षण अधिकारी तथा नसीब धनखड़, सहायक कृषि अभियंता, भिवानी ने भी मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा नैनो उर्वरकों के प्रभावी उपयोग पर विस्तृत जानकारी साझा की।
इफको हरियाणा के राज्य विपणन प्रबंधक डॉ. देवी दयाल ने बताया कि इफको किसानों को नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक करने तथा संतुलित पोषण प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. विनोद कुमार फोगाट, उप कृषि निदेशक (डीडीए) ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि क्षेत्र की बदलती चुनौतियों को देखते हुए किसानों को डीएपी एवं यूरिया जैसे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए उनके वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग के साथ-साथ डीएपी के प्रभावी विकल्प, नैनो उर्वरकों, जैव उर्वरकों एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण का संरक्षण होगा, बल्कि उत्पादन लागत में कमी आने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने सभी कृषि अधिकारियों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक गांव में किसानों को नैनो उर्वरकों के सही उपयोग, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, डीएपी के विकल्पों तथा प्राकृतिक खेती के बारे में जागरूक करें, ताकि हरियाणा में टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिल सके।
कार्यक्रम के अंत में कृषि अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के बीच डीएपी के विकल्प, नैनो उर्वरकों, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा कृषि विस्तार गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने किसानों तक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों एवं विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का संकल्प लिया।