*गोदी पत्रकार हिल जाएं, जब बाड़ी से निकले विनोद साहू*
दिल्ली के AC स्टूडियो में बैठकर सत्ता की आरती उतारने वालों, कान खोलकर सुन लो। बाड़ी, मध्यप्रदेश की धूल भरी सड़क से एक कलम ऐसी उठी है जो तुम्हारे कैमरे की चमक और स्क्रिप्टेड सवालों पर भारी है। नाम है *विनोद साहू*।
ये वो पत्रकार नहीं जो मंत्री जी के बंगले के बाहर माइक लेकर खड़े हो जाएं और पूछें "सर चाय कैसी लगी?"। ये वो है जो सवाल पूछता है तो कुर्सियां हिल जाती हैं।
*फर्क साफ है:*
- *तुम*: सत्ता से सवाल = TRP का नुकसान।
- *विनोद साहू*: सत्ता से सवाल = जनता का हक।
माथे पर लगा पीला चंदन और ॐ का तिलक बताता है कि ये कलम किसी पार्टी की गुलाम नहीं, महादेव की तरह सत्य के लिए अडिग है। गोदी में बैठकर दूध पीने वाली पत्रकारिता के दौर में, विनोद जी जैसे लोग जंगल में अकेले दहाड़ने वाले शेर हैं।
बाड़ी की रिपोर्टिंग में न कोई पैकेज है, न कोई एजेंडा। सिर्फ सच है, और सच बेबाक है।
गोदी पत्रकारों, डरो मत... बस थोड़ा शर्म कर लो। एक छोटे कस्बे का आदमी तुम्हें पत्रकारिता सिखा रहा है।
*कलम निडर हो तो सत्ता के गलियारे भी कांपते हैं 🙏 जय हो*