*दूसरी ऊर्जा*
ब्रह्मचारिणी (ग्रेविटेशनल फोर्स)
https://youtu.be/yCulxWxoqHk?si=oxGiAtoMSVX1Kxo2
ये जो दूसरी ऊर्जा है, इसका नाम ब्रम्हचारिणी है। यहाँ ब्रम्ह का अर्थ है, “इलेक्ट्रॉन’’ तथा “चारिणी” से तात्पर्य पकड़ कर रखने वाली, अर्थात् जो इलेक्ट्रॉन को पकड़कर रखती है और इलेक्ट्रॉन किसको पकड़ कर रखती हैं? प्रोटॉन- न्यूट्रॉन को। जिस इलेक्ट्रोन ने अणुओं को बांधकर रखा है, उसको दूसरी ऊर्जा ब्रम्हचारिणी ने पकड़कर रखा है। इसको आधुनिक विज्ञान गुरूत्वाकर्षण बल कहता है। इसी बल ने पूरे ब्रम्हांड को पकड़कर रखा है। हमारे प्राचीन ऋषियों ने इस ऊर्जा का नाम स्पष्ट तौर पर ब्रम्हचारिणी दिया है।
जो श्वेत धवल है, जिसके हाथों में रूद्राक्ष की मनके हैं, मानों ये मनके ब्रम्हाड के तारे, ग्रह, उपग्रह हों। जिनको इस ऊर्जा ने एक धागे में बांधकर पीरो दिया हो, न कोई आगे जा सकता न कोई पीछे हो सकता हो, सब ग्रह, तारे अपनी कक्षा में अनावरत घुम रहे हैं।
पूरे ब्रम्हांड को पकड़कर रखने वाली ऊर्जा ब्रम्हचारिणी ऊर्जा है।
जैसे हमारे हाथों में 4 या 5 गेंद बंधी हो और हम उन गेंद को कही भी फेंके वो वापस हमारे पास ही आएंगी। वैसे ही इस ब्रम्हांड में दिखने वाले सूर्य, चंद्रमा, तारे, और हमारी पृथ्वी, कितनी बड़ी हैं?
इस सौरमण्डल के सामने रेत के कण के बराबर हैं। इस सौरमण्डल में पृथ्वी से ज्यादा बड़े-बड़े ग्रह शनि, ब्रहस्पति भी भौरे की लट्टों की तरह घुम रहे हैं। हमारी पृथ्वी 10 हजार किलो मीटर/ सेकंड की गति से सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है, और अपने अक्ष में 23 ½ डिग्री झुकी होने पर भी 1600 किलोमीटर/सेकंड की गति अपने अक्ष में घुमती है। इतने पर भी कभी पृथ्वी विचलित नहीं हुई। अगर होती तो हम कभी भी भूतकाल, वर्तमानकाल और भविष्यकाल में होने वाली खगोलीय घटना को निश्चित समय में देख नहीं पाते।
जैसे इलेक्ट्रॉन ने सूक्ष्म अणुओं को पकड़ कर रखा है
वैसे ब्रह्मचारिणी ऊर्जा ने ब्राह्मण के ग्रहों को पकड़ कर रखा है।
शैलपुत्री ऊर्जा ने ग्रह बनाए तो दूसरी ऊर्जा ब्रह्मचारिणी ने इन ग्रहों में गुरुत्वाकर्षण का बल दिया।
दो ग्रहों के बीच जहां गुरुत्वाकर्षण बल शून्य हो जाता है वही आकाश तत्व है,
और
आकाश जहां शून्य है कुछ नहीं है वह पहला महाभूत है
जिसे हम पिता भी कहते है
भूमि माता है
तो
आकाश पिता है।
सृष्टि शून्य में स्थित है
इस शून्य को निर्मित करने वाली दूसरी ऊर्जा को हमारे पूर्वज ऋषियों ने देखा
श्वेत धवल
शांत
सौम्य
स्थिर
एक हाथ में मनको की माला
दूसरे हाथ में कमण्डल
कोई सवारी नहीं
हमारे पूर्वजों ने इन सभी सूक्ष्म ऊर्जाओं को देखा है
जैसा देखा वैसा वर्णन किया
इस सूक्ष्म दुनिया को आधुनिक क्वांटम फील्ड कहता है,कुछ समझने की बात कहता है,पर देखा नहीं इसीलिए ग्रेविटेशनल फोर्स को अभी एक्स मानकर चल रहा है।
हमने देखा,इन्हें देवी कहा,माता के रूप में पूजते है,माता तो सचमुच सहज होती है,केवल याद करने से,उपासना करने से,ध्यान करने से आपके हृदय में प्रकट हो जाती है,आंख बंद करो और पूरे श्रद्धा से स्मरण तो करो।