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बारां-यह क्या बोल गये-छबड़ा के पूर्व विधायक करणसिंह राठौड़....?
पानाचन्द जी मुस्कुराओ मत, हमारी खुशियों के लिए अब आपको मुस्कुराना पड़ेगा,
विधायक प्रताप सिंह सिंघवी को बताया 'तस्कर', प्रतापसिंह सिंघवी के डीएनए की करानी होगी जांच, तो क्या पूर्व विधायक को डीएनए और नार्कोटेस्ट में नहीं है अन्तर मालूम, राजनीतिक बयान पर अब छिड़ी बहस।।।
बारां में कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के दौरान छबड़ा के पूर्व विधायक करनसिंह राठौड़ द्वारा वर्तमान विधायक प्रताप सिंह सिंघवी पर लगाए गए आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है। धरना मंच से दिए गए अपने भाषण में करण सिंह राठौड़ ने विधायक प्रताप सिंह सिंघवी को लेकर तीखे शब्दों का प्रयोग किया, जिसके बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इस धरना प्रदर्शन के वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में अब इस बयान को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विरोधी पक्ष और स्थानीय लोगों का एक वर्ग करण सिंह राठौड़ के बयान पर सवाल उठा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि पर गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों और प्रमाणों के साथ बात रखी जानी चाहिए।
*छबड़ा के पूर्व विधायक करण सिंह का बयान*
करणसिंह बोले कि "जिले की जनता वास्तव में परेशान है, ओर स्थिति यह है कि हमारे छबड़ा में तो विधायक का गनमैन तस्कर ओर पूर्व ड्राईवर चोर निकला है, ऐसे मे ये विधायकजी भी *(त--+-+-+--स्कर)* हो सकते है।
ऐसे में जब बारां के पूर्व विधायक पानाचन्द मेघवाल सहित अन्य कांग्रेसी ठहाके मारने लगे तो करण सिंह ने कहा पानाचन्द जी मुस्कुराओ मत..... अब हमारी खुशियों के लिए आपको मुस्कुराना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि छबड़ा विधायक सिंघवी का भी डीएनए टेस्ट करवाना पड़ेगा "
साथ ही, पूर्व विधायक करण सिंह ने मंच से हंसते हुए कहा कि "छबड़ा विधायक का भी डीएनए टेस्ट होना चाहिए, इसकी मांग के लिए मैं धरने पर बैठूंगा,
भायाजी मैं आपकी दुकान पर आ रहा हूं, तो आपको भी मेरी दुकान में भी आना होगा।
वहीं शायद पूर्व विधायक करण सिंह को यह भी मालूम नहीं है कि कौन सा टेस्ट किस स्थिति में होता है।।
हालांकि नार्को टेस्ट और DNA टेस्ट दोनों ही आपराधिक जांच के लिए उपयोग किए जाने वाले बिल्कुल अलग-अलग परीक्षण हैं। नार्को टेस्ट एक पूछताछ की विधि है जिसमें आरोपी को 'सच्चाई का सीरम' (Sodium Pentothal) देकर अर्ध-बेहोशी की हालत में सच उगलवाया जाता है, जबकि DNA टेस्ट एक वैज्ञानिक जैविक परीक्षण है जो शरीर के नमूनों (जैसे खून, बाल या लार) से किसी व्यक्ति की पहचान या जैविक संबंधों (माता-पिता/अपराधी) को साबित करता है।
अब सवाल यह है कि छबड़ा के पूर्व विधायक करण सिंह राठौड़ आखिर नार्को टेस्ट की जगह DNA टेस्ट क्यों करवाना चाहते हैं।।
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Baran, Baran | Jun 3, 2026