डोंगल नहीं लगने से अटका आवासीय, जाति व आय प्रमाणपत्र,
सीओ के अवकाश पर रहने से प्रमाणपत्र जारी नहीं हो रहा, ऑनलाइन आवेदन करने वाले युवक रोज लौट रहे खाली हाथ,
शिवहर/। पिपराही प्रखंड क्षेत्र में आवासीय, जाति एवं आय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन करने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। अंचल कार्यालय में संबंधित प्रमाणपत्रों के ऑनलाइन आवेदन के बाद सीओ का डोंगल नहीं लगने के कारण प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहा है। इसके चलते कई युवक-युवतियां रोज अंचल कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
बताया गया कि अंचलाधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण प्रमाणपत्रों के निष्पादन की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। डोंगल नहीं लगने के कारण ऑनलाइन आवेदन के बावजूद आवासीय, जाति और आय प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पा रहा है। इससे उन छात्र-छात्राओं और युवाओं की परेशानी अधिक बढ़ गई है, जिन्हें विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में ऑनलाइन आवेदन,या अन्य परीक्षा में आवेदन करने व छात्रवृत्ति अथवा अन्य ऑनलाइन आवेदन के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रमाणपत्र जमा करना है।
युवक नौशाद आलम ने बताया मेरी बहन का आवासीय प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है, लेकिन प्रमाणपत्र नहीं बनने के कारण आगे का ऑनलाइन फॉर्म नहीं भर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि समय सीमा के भीतर आवेदन नहीं हो सका तो उनका महत्वपूर्ण अवसर छूट सकता है। इसी तरह अन्य युवाओं ने भी अंचल कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्या बताई और जल्द प्रमाणपत्र जारी कराने की मांग की।
आवेदकों का कहना है कि प्रमाणपत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी यदि तकनीकी अथवा प्रशासनिक कारणों से प्रमाणपत्र समय पर जारी नहीं होता है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों और बेरोजगार युवाओं पर पड़ता है। कई आवेदकों को अलग-अलग कार्यों के लिए आवासीय, जाति और आय प्रमाणपत्र की तत्काल आवश्यकता है।
आवेदकों ने प्रशासन से मांग की है कि सीओ के कार्यालय लौटने के बाद लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन कराया जाए और डोंगल लगाकर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज की जाए। युवाओं ने कहा कि यदि सोमवार को सीओ के लौटने के बाद डोंगल लगाया जाता है तो लंबित आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित किया जाना चाहिए, ताकि समय सीमा के कारण किसी आवेदक को परेशानी न हो।
लोगों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया है कि प्रमाणपत्रों के लंबित रहने की स्थिति में आवश्यकतानुसार वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, जिससे ऑनलाइन आवेदन और नामांकन जैसी समयबद्ध प्रक्रियाओं में युवाओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।