मुशहरी: उद्धव दास महाराज ने मंगलाचरण, गुरु-वंदना और हरिनाम संकीर्तन के साथ समुद्र मंथन शुरू किया, वामन अवतार पर प्रवचन दिए
समुद्र मंथन प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि संसार रूपी समुद्र में जीव निरंतर संघर्षरत है, किन्तु भगवान का नाम ही उसके जीवन का वास्तविक अमृत है। वामन अवतार के माध्यम से उन्होंने राजा बलि के समर्पण एवं भगवत्शरणागति को शुद्ध भक्ति का अनुपम उदाहरण बताया। इसके पश्चात राम वनवास एवं भरत प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन करते हुए उद्धव दास जी महाराज भावविभो