बीस वर्ष की आयु में व्यक्ति का जो चेहरा रहता है, वह प्रकृति की देन होता है
तीस वर्ष की आयु का चेहरा जीवन के उतार चढ़ाव की देन होता है
लेकिन पचास वर्ष की आयु का चेहरा व्यक्ति की अपनी कमाई होती है इसलिए अपना आपा और आत्मविश्वास खोए बिना, अपने विषय में कुछ भी सुन सकने की योग्यता ही शिक्षा है
किसी शायर ने कहा है "कल न हम होंगे न गिला होगा, सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिलसिला होगा
जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता ले, जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।
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