*गौसेवा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति की सेवा भी है*
आकोला (रमेश चन्द डाड) श्रीमुनिकुलब्रह्मचर्याश्रम वे. सं. बरूंदनी में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस भगवान श्रीकृष्ण की गोचरण लीला, माखन-चोरी लीला एवं गोवर्धन पूजा महोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा के उपरांत गोवर्धन पूजा का उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष के बीच गोवर्धन महाराज की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि एवं लोककल्याण की कामना की।
व्यासपीठ से कथा प्रवक्ता पूज्य कुलदीप जी शर्मा बांगरेड़ ने कहा कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में माता का स्थान रखती है। गौमाता के दूध, दही, घी, गोबर एवं गोमूत्र से मानव जीवन और कृषि दोनों का कल्याण होता है। इसलिए गौसेवा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति की सेवा भी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गौसंरक्षण एवं गौसेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण की माखन-चोरी एवं गोचरण लीला का सुंदर वर्णन करते हुए बताया गया कि श्रीकृष्ण का बालस्वरूप प्रेम, सरलता, निष्कपटता और वात्सल्य का प्रतीक है। उनकी प्रत्येक लीला मानव जीवन को प्रेम, सेवा और भक्ति का संदेश देती है।
गोवर्धन पूजा के प्रसंग में बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान का नाश कर गोवर्धन पर्वत की पूजा का संदेश दिया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि प्रकृति, पर्वत, जल, वनस्पति और समस्त पर्यावरण की रक्षा एवं सम्मान करना ही सच्ची ईश्वर-भक्ति है। भागवत महापुराण हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, संरक्षण और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
कथा के समापन पर भव्य आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। बड़ी संख्या में आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म, गौसेवा, प्रकृति संरक्षण एवं भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का दिव्य संदेश ग्रहण किया।