एक कचौरी, दो समोसा...
"इन मर्दों का क्या भरोसा?"
ये लाइन इन दिनों वायरल है।
लेकिन एक सवाल जरूरी है...
क्या कुछ लोगों के गलत काम की वजह से हर मर्द को एक ही नजर से देखना सही है?
इस तस्वीर में एक ऐसा मर्द भी है, जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने में भूमिका निभाई।
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में कॉकपिट के अंदर हुए हमले में कप्तान स्मित मच्छर घायल हुए। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में मदद की, जिसके बाद पैसेंजर्स और क्रू ने अटैकर को काबू करने में मदद की और विमान की सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग हुई।
यानी जब हालात जान पर बन आई थी, तब उन्होंने सिर्फ "मैं" नहीं सोचा, बल्कि उन सैकड़ों लोगों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जो विमान में थे।
गलत करने वालों को गलत कहिए।
उनके खिलाफ आवाज उठाइए।
लेकिन एक-दो लोगों के व्यवहार के आधार पर पूरे "मर्द" समाज को एक ही तराजू में मत तौलिये।
क्योंकि हर घर में एक बेटा होता है, एक भाई होता है, एक पति होता है और