कुपोषण और एनीमिया के विरुद्ध मुरैना में दस्तक महाअभियान का शुभारंभ
डीएसएस तकनीक से होगी बच्चों की रियल-टाइम स्क्रीनिंग
जिले में पांच वर्ष तक के बच्चों को कुपोषण, एनीमिया एवं अन्य गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला चिकित्सालय मुरैना में दस्तक अभियान का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मेश उपाध्याय, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. गजेंद्र सिंह तोमर, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अजय गोयल, एविडेंस एक्शन के तकनीकी सलाहकार एवं संभागीय समन्वयक श्री ऋषिकांत पाण्डेय, टीकाकरण प्रभारी श्रीमती मुन्नी राजावत सहित स्वास्थ्य विभाग का मैदानी अमला उपस्थित रहा। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर अभियान का शुभारंभ किया तथा पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाकर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की।
अभियान का मुख्य उद्देश्य पांच वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण, एनीमिया तथा अन्य गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर उन्हें त्वरित एवं समुचित उपचार उपलब्ध कराना है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मेश उपाध्याय ने कहा कि दस्तक अभियान जिले के बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर बच्चों में कुपोषण, गंभीर एनीमिया तथा अन्य बीमारियों की पहचान करेंगी। उन्होंने कहा कि जिले के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना तथा गंभीर रूप से बीमार बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अजय गोयल ने बताया कि अभियान के तहत नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक प्रदान की जा रही है। यह खुराक बच्चों की दृष्टि क्षमता को सुदृढ़ करने तथा उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने शत-प्रतिशत टीकाकरण एवं विटामिन-ए कवरेज सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष दस्तक अभियान को तकनीकी रूप से और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाया गया है। एविडेंस एक्शन के तकनीकी सलाहकार एवं संभागीय समन्वयक श्री ऋषिकांत पाण्डेय ने जानकारी दी कि अभियान में पहली बार डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से फील्ड स्तर पर प्रत्येक बच्चे की स्वास्थ्य जांच और रेफरल प्रक्रिया की रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं ट्रैकिंग की जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि डीएसएस के उपयोग से अति कुपोषित (एसएएम) एवं गंभीर रूप से बीमार बच्चों की पहचान अधिक सटीकता और प्रभावशीलता के साथ संभव हो सकेगी। स्वास्थ्य कार्यकर्ता ऐसे बच्चों को तत्काल चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) अथवा उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर सकेंगे, जिससे उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करेंगी तथा अभिभावकों को आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श एवं उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी प्रदान करेंगी।
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