TCBT (ताराचंद बेलजी तकनीक)को पंचमहाभूत कृषि क्यों कहा जाता है...
सुनिये पूरी कहानी इस ऑनलाइन चर्चा में...
🌸भूमि माता तत्व है,इसकी तृण मात्रा रूप (अणु) है,यह काया बनाती है, अणुओं की पूर्ति करती है जिससे काया(शरीर) रचना पूरी रहती है
🌸गगन पिता तत्व है, इसकी तृण मात्रा रंग है,यह बीज बनाती है
🌸वायु प्राण तत्व है,इसकी तृण मात्रा गंध है,यह मन को पोषण देती है
🌸अग्नि स्फूर्ति (वाइब्रेशन)तत्व है,इसकी तृण मात्रा स्वर है,यह यह कंपन करती है,अणु और कोशिका के संपर्क की भाषा वाइब्रेशन ही होता है,यह शरीर में स्फूर्ति लाती है
🌸नीर जीवनी तत्व है,इसकी तृण मात्रा स्पर्श है,यह कोशिका विभाजन करके नई जीवन संरचना बनाती है।
पंच महाभूतों की पांचों तृण मात्राएं उक्त प्रक्रिया से कमशः
🌼अन्न मय कोष
🌼प्राण मय कोष
🌼मनो मय कोष
🌼विज्ञान मय कोष
🌼आनंद मय कोष
ऐसे 5लेयर शरीर संरचना का निर्माण करती है।
जो पूर्ण है।
अंदर जाने की यात्रा इसे शून्य तक ले जाती है
बाहर की यात्रा इसे विराट बनाती है।
हमने इस विज्ञान को कृषि में स्थापित किया है
भूमि और बीज के पंच महाभूत पूर्ण करते है
फसल में पंच महाभूत ऊर्जा को पूर्ण और संतुलित रखते है
ऐसे फसल की निकली खाद्यान्न खाने से खाने वाले व्यक्ति के पंच महाभूत स्वत:ही पूर्ण हो जाते हैं
खेती की भूमि के पंच महाभूत पूर्ण होने से भूमि भी शुद्ध सजीव हो जाती है,
प्रकृति की यही व्यवस्था
स्वयंपोशी स्वयंविकाशी स्वयंपूर्ण व्यवस्था कहलाती है।
पंच महाभूत कृषि इसी व्यवस्था को स्थापित करने के लिए सज्ज है।